
दूरदर्शन संचके कार्यक्रम और उसका बाल मनपर प्रभाव !
आज अनेक पालक अपने बच्चेको यथोचित समय नहीं दे पाते हैं, कई बार वे व्यस्त रहते है और बच्चे उनके कार्यमें व्यवधान न डालें इसलिए वे बच्चोंको दूरदर्शन संचमें कोई कार्यक्रम देखने हेतु कहते हैं, इससे बच्चोंके शारीरिक मानसिक बौद्धिक और आध्यात्मिक सभी प्रकारके विकासमें अवरोध पैदा होता है |
शारीरिक स्तरपर होनेवाले हानि :
बैठे रहनेके कारण बच्चोंका शारीरिक विकास यथोचित ढंगसे नहीं हो पाता है, इस आयुमें शारीरिक श्रमवाले खेल उनके शारीरिक विकासके लिए अधिक लाभकारी होता है, साथ ही अकेले धारावाहिक इत्यादि देखते रहनेके कारण बच्चा एकाकी रहना चाहता है , अनेक बार वह बाहरी बने भोज्य पदार्थ जैसे चिप्स, कुरकुरे इत्यादि जिसमें संरक्षक तत्त्व (preservatives) जो बच्चोंके शरीरके लिए हानिकारक होता है, कार्यक्रम देखते समय उसे ग्रहण करता रहता है इससे विदेशमें और आजकल भारतके कई बडे शहरोंमें मोटापा एक महारोग समान बच्चोंमें बढता हुआ दिखाई दे रहा है | आज बच्चे बाहर निकलकर शारीरिक श्रमवाले खेल नहीं खेलना चाहते हैं !
मानसिक स्तरपर होनेवाली हानि :
दूरदर्शन संचसे प्रसारित होनेवाले कार्यक्रमोंसे वह एक प्रकारसे वह इतना आसक्त हो जाता है कि यदि उसे उसके मनानुसार कार्यक्रम देखनेको न मिले तो वह उत्तेजित होकर क्रोध करना चीखना रोना, चिल्लाना इस प्रकारकी कृतियां करने लगता है जो एक स्वस्थ व्यक्तित्त्व रचनामें भविष्यमें अडचन निर्माण करता है और उसे हिंसक बनाता है | अयोग्य कार्यक्रम देखनेसे बच्चेमें अल्प आयुमें ही वासना जागृत हो जाती है और आज अनेक युवा अल्प आयुमें बिना विवाह यौनाचार एवं बलात्कार करने लगे हैं | -तनुजा ठाकुर
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