
सूर्योदयसे पूर्व उठना शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य दोनोंके लिए लाभकारी होता है | अतः यह संस्कार बच्चोंमें अवश्य डालनेका प्रयास करना चाहिए । अब तो वैज्ञानिकोंने भी यह शोध कर बता दिया है कि सुबह शीघ्र उठनेवालोंकी मेधा शक्ति एव शारीरिक क्षमता देरसे उठनेवालोंसे कई गुना अधिक अच्छी होती है |
कई बार ऐसा देखनेमें आया है कि माता-पिता, यदि बच्चोंको विद्यालय सुबहमें जाना हो तो उन्हें उठा देते हैं और छुट्टी वाले दिनोंमें उन्हें दस बजे तक सोये रहने देते हैं | गर्मीकी छुट्टियोंमें भी बच्चे देर तक सोते रहते हैं और उन्हें नहीं उठाना यह माता–पिताको बच्चेके प्रति प्रेम लगता है | वस्तुतः सूर्योदय पश्चात् नियमित उठनेसे बच्चोंमें अनुशासनका बीजारोपण होता है उसके शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्यके लिए योग्य होता है | पालकोंको कहांपर कडाई करना चाहिए और कहां नहीं ? यह आज अधिकांश माता–पिताको ज्ञात नहीं होता | एक बार मैं अपनी एक सखीके घर चार दिवस रुकी थी, उस समय उनके बच्चोंकी ग्रीष्मकालीन छुट्टियां थीं और मैंने पाया कि उनकी सोलह वर्षीय पुत्री प्रतिदिन बारह बजे सो कर उठती थी | जब मैंने उसे कहा कि उसे सुबह शीघ्र उठाया करो तो उसने कहा “दो चार वर्षमें उसका ब्याह हो जाएगा और फिर तो उसे सुबह उठना ही होगा और अभी तो छुट्टियां हैं, इसलिए उसे मैं सोने देती हूं | जब मायकेमें आप अपनी पुत्रीको योग्य संस्कार नहीं देंगी तो वह ससुरालमें अपने उत्तरदायित्त्वका निर्वाह कैसे कर पाएगी यह सामान्य सी बात उसे समझमें नहीं आई |
सुबहके समय सम्पूर्ण दिवसकी अपेक्षा अधिक सात्विकता होती है; अतः सुबहमें उठना विद्यार्थी जीवनमें सदैव श्रेयस्कर है | सुबहके समय पाठ शीघ्र स्मरण हो जाता है | सुबहके समय किया गया योग, व्यायाम अधिक लाभकारी सिद्ध होता है | सुबहके समयका सूर्य स्नान भी शरीरकी विटामिन डीकी मात्रको पूर्ण करता है | यह सब तथ्य बच्चोंको बचपनमें ही आत्मसात् करवाना पालकोंका उत्तरदायित्त्व है | -तनुजा ठाकुर
Ekdum sahi kaha apne ab mai roj subah uthne ki koshish krunga