मुसलमान युवकको मारने व बलपूर्वक ‘जय श्रीराम’का उद्घोष करानेके आरोपमें न्यायालयने दोनों आरोपियोंको प्रदानकी प्रतिभूति, बताए गए आरोप है निराधार
३ फरवरी, २०२२
झारखंडमें एक मुसलमान व्यक्तिको मारनेके आरोपमें बन्दी बनाए गए दो व्यक्तियोंको धनबादके सत्र न्यायालयने प्रतिभूति प्रदान की है । इन दोनों व्यक्तियोंपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मुसलमान युवकको बलपूर्वक ‘जय श्रीराम’का उद्घोष करवाया था । वहीं युवकोंने स्पष्ट कहा था कि उन्हें अकारण फंसाया गया है एवं समस्त आरोप निराधार हैं । उनके अनुसार, मुसलमान युवकने भगवान श्रीरामके विषयमें अपशब्द कहे तथा ‘बीजेपी’ नेताओंके विरुद्ध भी इनका प्रयोग किया था, इसी कारण वह मुसलमान युवकसे कठोरतासे व्यवहार कर रहे थे । वहीं मुसलमान युवकके भाईने कहा कि उसका बडा भाई गांधीकी मूर्तिके समीप मार्गको पार कर रहा था, उसी समय आरोपियोंने उसे देखा व मारपीटकर थूक चाटनेको बाध्य किया एवं ‘जय श्रीराम’के नारे लगवाए । वहीं परिवादको निराधार बताते हुए आरोपियोंकी ओरसे इस प्रकरणको षड्यन्त्र कहा गया है । प्रकरणका एक ‘वीडियो’ भी साझा हो रहा है, जिसमें क्रोधित जनसमूह मुसलमान युवकसे बारम्बार पूछ रही है कि ‘तुमने क्यों बोला’ एवं इसका उत्तर देते हुए युवक कहता है कि उससे चूक हो गई । इसीके पश्चात लोगों उससे खींचातानी करते दृष्टिगत होते हैं ।
आरोपी हिन्दू हैं इसलिए प्रकरण चर्चित हुआ और निरपराध होनेपर भी उन्हें प्रताडित किया जा रहा है, यह हिन्दूद्रोही मानसिकताका परिणाम है । हिन्दू सामान्यतः सहिष्णु ही होता है; किन्तु उसकी इसी सहिष्णुताके कारण आज वह प्रताडित हो रहा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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