जनवरी २, २०१९
बंगलुरुमें एक बिशप और एक पादरीके विरुद्घ परिवाद प्रविष्ट कराई गई है कि उसने एक दलित महिलाके साथ छेडछाड की और उसे चेतावनी भी दी । इसके पश्चात महिलाने आत्महत्या करनेका प्रयास किया । ‘न्यूज-१८’के समाचारके अनुसार आपराधिक आरोपोंके चलते कर्नाटकके पादरी विनोद दासन और बिशप पीके सैमुअलके विरुद्घ महिलाको अपमानित करनेके लिए प्राथमिकी प्रविष्ट कराई गई थी । परिवादके अनुसार पादरीने महिलासे उनके विरुद्घ २०१३ का एक प्रकरण वापस लेनेके लिए कहा था जोकि पुलिसके अनुसार एससी/एसटी समुदायके सदस्योंके विरुद्घ अत्याचारके लिए प्रविष्ट किया गया था ।
इसके पश्चात पादरीने उस महिला और उसके पतिको २१ जनवरीको हलासुरूमें ट्रिनिटी गिरिजाघरके पास आनेके लिए कहा था । जब महिलाका पति पादरीसे बात करनेमें व्यस्त था, उस मध्य बिशप महिलाको गिरिजाघर परिसरसे बाहर ले गया । उसने महिलाको अभियोग वापस लेनेके लिए एक कोटि रुपए देनेके साथ-साथ चाकरी देनेका भी वचन दिया । पुलिसको दिए गए वक्तव्यके अनुसार जब महिलाने ऐसा करनेसे मना कर दिया तो बिशपने उसका यौन उत्पीडन किया और उसे चेतावनी दी कि यदि उसने यह बात अपने पतिको बताई तो उसे मार दिया जाएगा !
३१ जनवरीको रात्रिके लगभग १ बजे महिलाने कीटनाशकका सेवनकर आत्महत्या करनेका प्रयास किया । एक पुलिस अधिकारीने कहा कि उल्सूर पुलिस स्टेशनमें प्रविष्ट परिवादके आधारपर जांच की जा रही है । सैमुअल ‘पोक्सो’में भी आरोपी है, जिसके लिए न्यायालयने अप्रैल २०१८ में उसके विरुद्घ ‘गैर जमानती वारंट’ जारी किया था, यद्यपि इसमें अबतक कोई बन्दी नहीं बनाया गया है ।
“पादरीके पास यदि महिलाको देनेके लिए एक कोटि धन है तो धर्मपरिवर्तनके लिए कितना धन आता होगा, इसका अनुमान लगान कठिन है ! पादरी शासकीय चाकरी भी लगवा सकता है अर्थात शासनमें भी उसीके पिठ्ठू बैठे हैं । अप्रैल २०१८ में बन्दी बनानेके आदेशके पश्चात पादरी अभीतक खुला घूम रहा है और निर्दोष हिन्दू वृद्ध सन्तोंको न्यायालय आतंकवादीकी भांति ढूंढवाता है और जो पादरी पकडे गए, उन्हें दो दिवसमें ही छोड दिया जाता है; परन्तु हिन्दू सन्तोंको नहीं, इससे ही इनकी हिन्दूद्रोहिताका बोध होता है और नारीवाद और दलितवादका दम भरनेवाले ऐसे प्रकरणोंमें कहां चले जाते हैं ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : फर्स्टपोस्ट
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