जनसंख्याका क्षेत्रीय सन्तुलन ही नहीं परिवर्तित कर रहे ‘बांग्लादेशी’, लाचार-श्रमिक बनकर बन गए हैं अपराधके कर्ता-धर्ता भी, समूचे देशमें फैलकर कर रहे अपराध
२० दिसम्बर, २०२१
देहली ‘पुलिस’ने ‘बांग्लादेशी’ नागरिक शहादत खानको पकडा है । समाचार प्रतिवेदनोंके अनुसार, उसकी पत्नी ‘नौकरानी’ बनकर घरोंमें कार्य करने जाती पश्चात शहादत अपने साथियोंके साथ उन्हीं घरोंमें अपराध करता है । इससे पूर्व अक्टूबरकी एक रात्रि लखनऊके चिनहटमें मुठभेड हुई । तीन ‘बांग्लादेशी’ पकडे गए । पूछताछसे यह बात सामने आई थी कि ‘बांग्लादेशियों’का यह समूह (गिरोह) कबाडी बनकर दिनमें ‘रेकी’ करता और रात्रिको अपराध करने निकल जाता । इतना ही नहीं अपराधके मध्य विरोध किए जानेपर ये हत्या और दुष्कर्म करते थे । इसी वर्ष मईमें बेंगलुरू ‘पुलिस’ने ऐसे ‘बांग्लादेशियों’को पकडा था; जिन्होंने सामूहिक दुष्कर्मके पश्चात पीडिताका दृश्यपट सार्वजनिक कर दिया । उसके गुप्ताङ्गमें मदिराकी ‘बोतल’ घुसा दी थी ।
ऐसी घटनाओंकी सूची लम्बी है, जो बताती हैं कि ‘बांग्लादेशी’ कैसे समूचे देशमें फैल रहे हैं । प्रत्येक प्रकारके अपराधमें लिप्त रहे हैं । कभी ‘नौकरानी’ बन, कभी श्रमिक तो कभी कबाडी बन । ये घटनाएं बताती हैं कि जिस समय आपने उन्हें निरीह मान लिया, उसी समय आप उनके लक्ष्य बन गए । अवैध प्रकारसे भारतमें घुसे ये घुसपैठिए हमारी अर्थव्यवस्थासे लेकर सामाजिक सन्तुलनतकको बिगाड रहे हैं ।
‘बांग्लादेशी’ गत कई दशकसे केवल जनसंख्याके क्षेत्रीय असन्तुलनके अनुसार देशके कुछ क्षेत्रोंमें सङ्कटके रूपमें देखे जा रहे थे, उनसे जुडे सङ्कटका क्षेत्र निरन्तर बढता जा रहा है । वे देशके प्रत्येक क्षेत्रमें फैलकर आखेटकी ताकमें बैठे हुए हैं । इस युद्धमें हम जितनी विलम्ब करेंगे, हमारी सभ्यता, संस्कृति एवं ‘जानमाल’का सङ्कट उतना ही बढता जाएगा । आवश्यकता है कि केन्द्रीय शासन और राज्य शासनोंको मिलकर कठोर कार्यवाही करनी चाहिए । बंगलादेशी हों या रोहिंग्या, सभीको देशसे बाहर निकालें और भारतीय नागरिकोंकी सुरक्षा सुनिश्चित करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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