मार्च ३०, २०१९
कैंट स्थित मिशनरीज विद्यालय बिशप कॉनराडपर गम्भीर आरोप लगे हैैं । गुरुवारको परिणाम वितरणके पश्चात ग्यारवहीं कक्षाके छात्र-छात्राओंने यह कहते हुए हंगामा आरम्भ कर दिया कि विद्यालय प्रशासनने हमपर धर्म परिवर्तनका दबाव डाला था । ऐसा न करनेपर अनुत्तीर्ण कर दिया । प्रकरण आया तो सभी परिजन भी पहुंच गए । पहले विद्यालय, तत्पश्चात कोतवाली पहुंचकर हंगामा किया । प्रकरण धर्म परिवर्तनसे जुडा था । तुरन्त ही हिन्दू, मुस्लिमके साथ ईसाई समाजके प्रतिनिधि भी पहुंच गए । विद्यालय प्रशासनपर कार्यवाहीकी मांगको लेकर अड गए । हंगामा बढता देख सीओने आश्वासन दिया; परन्तु वे संतुष्ट नहीं हुए । विवाद बढता देख विद्यालय प्रशासनको कोतवाली बुलाया गया । उन्होंने आरोपोंको नकार दिया । साथ ही तीन सदस्यीय समिति गठित कर पुनः प्रति जांच करने और जांचमें दोषी पाए जानेपर कार्यवाहीका भरोसा देकर परिजन लौटा दिए ।
यद्यपि, उनके इस आश्वासनपर भी क्रोधित विद्यार्थी, परिजन व धार्मिक संगठनोंके पदाधिकारी संतुष्ट नहीं हुए । कोतवालीसे सीधे एसपी सिटीके पास पहुंचे और अभियोग प्रविष्ट करानेकी मांग की । बादमें संयुक्त शिक्षा निदेशकसे भी मिलकर परिवाद की । भीडके समर्थनमें शिक्षक सार्थक उनसे भी आगे निकले । कार्यवाही न होती देख ‘सीबीएसई’से परिवाद करने देहली रवाना हो गए । कहा, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीसे भी गुहार लगाऊंगा ।
गुरुवारको बिशप कॉनराड विद्यालयमें परीक्षा परिणाम वितरण हुआ । सातवीं, नौंवी और ११वींके अधिकांश छात्र अनुत्तीर्ण थे । अधिकांश छात्र वर्ग विशेषके सम्मिलित थे । परिणाम देख छात्रों और उनके परिजनोंने हंगामा आरम्भ कर दिया । किसीप्रकार विद्यालय प्रशासनने सभीको बाहर निकाला । इसी मध्य कॉमर्सका शिक्षक सार्थक सहगल परिजनों व विद्यार्थियोंको कोतवाली लेकर पहुंच गए ।
अपना कार्यकाल पूरा कर चुके शिक्षक सार्थकने बताया कि मुझपर भी धर्म परिवर्तनका दबाव बनाया गया । सात लाख रुपयेका लालच दिया । मुझसे पहले भी दो लोगोंने धर्म परिवर्तित किया । उन्हें इतने रुपये दिए गए । मेरे विरोध करनेपर मुझे छेडखानीके आरोपमें फंसानेकी चेतावनी दी ।
“ये हैं ईसाई विद्यालयोंकी सत्यता ! उद्देश्य है केवल हिन्दुओंका धर्म परिवर्तन करना या उन्हें धर्महीन बनाना और हिन्दू माता-पिता गर्वसे अपने बालकोंको इस सर्वनाशके रास्तेपर अपने हाथोंसे धकेलते हैं ! आजके हिन्दुओंके लिए आज धर्म नहीं स्वार्थ महत्त्वपूर्ण है । आजके माता-पिता बालकोंको धर्मकी नहीं वरन अपना सब कुछ विक्रयकर धन कैसे अर्जित करना है, यह सिखाने हेतु उन्हें ईसाईयोंके विद्यालयोनमें भेजते हैं और जब वह बालक विद्यालयसे बाहर आता है तो उसकी ऐसी स्थिति होती है कि उसे हिन्दीमें उनसठ कहो तो समझ नहीं आता तो राम-कृष्ण तो दूरकी बात है ! माता-पिताको भगवानकी संज्ञा दी गई है; परन्तु अपने बालकोंको नष्ट करनेवाले ऐसे माता-पिताको क्या कहा जाए ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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