आयुर्वेद अपनाएं, स्वस्थ रहें ! (भाग – ११)


बथुआको (Bathua, चाकवत) विशेष रूपसे खरपतवारके रूपमें जानते हैं, और हममेंसे बहुतसे लोग बथुआके लाभ जाने बिना ही इसे नष्‍ट भी कर देते हैं ! सम्भवतः उन लोगोंको यह नहीं ज्ञात है कि बथुआ बहुतसे स्‍वास्‍थ्‍य लाभोंसे भरा हुआ है और भारतमें एक स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक सब्‍जीके रूपमें प्रसिद्ध है ।
*घटक – वनस्पति विशेषज्ञोंके अनुसार, बथुएमें लौह, सोना, क्षार, पारा, ‘कैरोटिन’, ‘कैल्शियम’, ‘फॉस्फोरस’, ‘पोटैशियम’, ‘प्रोटीन’, वसा तथा ‘विटामिन-सी व बी-२’ पर्याप्त मात्रामें पाए जाते हैं । इनके अतिरिक्त इसमें  ‘कार्बोहाइड्रेट’, ‘राइबोफ्लेबिन’, ‘नियासिन’, ‘थायमिन’ भी पाए जाते हैं ।
*बथुएका शाक (साग) – बथुएका शाक बनाते समय कम-से-कम मसालों व घी, तेलका प्रयोग करना चाहिए । गायके घी व जीरेका तडका (छौंक) लगाकर सेंधा नमक डालके बनाए गए बथुएका शाक खानेसे नेत्रज्योति बढती है । यह आमाशयको शक्ति देता है, इससे कब्ज दूर होती है और वायुगोला व सिरदर्द भी मिट जाता है । शरीरमें शक्ति आती है व स्फूर्ति बनी रहती है  ।
आइए, बथुएके लाभके विषयमें जानते हैं –
*उदर रोगमें – जब तक बथुएका शाक (साग) मिलता रहे, प्रतिदिन खाएं । बथुएका उबाला हुआ पानी पिएं, इससे उदरके रोग, यकृत (लीवर), तिल्ली, अजीर्ण (पुरानी कब्ज), गैस, कृमि (कीडे), अर्श (बवासीर) और पथरी आदि रोग ठीक हो जाते हैं ।
*पथरी – १ गिलास कच्चे बथुएके रसमें शक्कर मिलाकर प्रतिदिन पीनेसे पथरी गलकर बाहर निकल जाती है ।
*कब्ज – बथुआ आमाशयको शक्ति देता है और कब्जको दूर करता है । यह उदरको स्वच्छ करता है; इसलिए कब्ज वालोंको बथुएका शाक (साग) प्रतिदिन खाना चाहिए । कुछ सप्ताह बथुएका शाक खाते रहनेसे सदैव होने वाली कब्ज दूर हो जाती है ।
इनके अतिरिक्त यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणुवर्धक शाक है ।
सेवन-विधि – बथुआको भारतमें पत्तेदार शाकके रूपमें उबालकर उपयोग किया जाता है । भारतमें तैयार किये जानेवाले अन्‍य व्‍यंजनोंमें जैसे रायता, पराठामें भी इसका उपयोग किया जाता है । मधुमेहके लिए आप बथुआके पत्तोंका रस निकालकर, इसका सेवन कर सकते हैं । इसे और अधिक प्रभावी बनानेके लिए आप इसमें नींबूके रसकी थोडीसी मात्रा मिलाकर नियमित रूपसे प्रातःकाल और संध्याकाल सेवन करें ।
सावधानियां – सीमित मात्रामें सेवन करनेसे बथुआसे कोई भी हानि नहीं होती है, परन्तु यदि अधिक मात्रामें इसका सेवन किया जाता है तो इसके निम्न गम्भीर परिणाम भी हो सकते हैं –
१. बथुआके पौधेमें ‘ऑक्‍सीलिक अम्ल’ अधिक मात्रामें होता है, जो कैल्शियमकी उपलब्‍धताको अल्प कर सकता है; परिणामस्‍वरूप, आपके शरीरमें कैल्शियमकी न्यूनताके (कमीके) कारण बहुतसी हानियां हो सकती हैं; इसलिए बथुआका सेवन अल्प मात्रामें करना चाहिए ।
२. बथुआके बीजोंमें गर्भपातकी सामग्री होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओंको इसके सेवनसे बचना चाहिए ।
३. यदि आप अधिक मात्रामें बथुआका सेवन करते हैं तो यह आपके उदरकी समस्‍याओंको बढा सकता है ।



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