दलित बच्चोंको भोजनमें गोमांस, पढनेके लिए बाइबल, विरोध करनेपर दबाते थे गला, ४८ घण्टोंमें ‘पुलिस’ अधीक्षकसे राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोगने मांगा उत्तर


११ दिसम्बर, २०२१
       मध्य प्रदेशके सागर जनपदमें दलित समाजके अवयस्क बच्चोंपर धर्मान्तरणके दबाव और उन्हें बलात गोमांस खिलाने और बाइबल पढानेकी घटना सामने आई है । यह प्रकरण श्यामपुराके सेवाधाम आश्रमका है । अब इस प्रकरणमें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोगने संज्ञान लिया है । आयोगने ‘पुलिस’ अधीक्षक सागरको कार्रवाहीका निर्देश देते हुए ४८ घण्टोंके भीतर उत्तर मांगा है ।
      समाचार संस्थानोंके प्रतिवेदनके अनुसार, ‘सेंट फ्रांसिस’ सेवाधामके विरुद्ध कैंट ‘थाने’में परिवाद प्रविष्ट हुआ है । परिवादकर्ता भाई-बहन हैं, जो वहां लगभग १८ माहसे रह रहे थे । गोमांस न खाने और बाइबिल न पढनेपर उन्होंने अपने साथ उत्पीडन होनेकी बात कही है ।
     इस प्रकरणपर स्थानीय हिन्दू समाजसेवी ओंकार सिंहके अनुसार, पहले इसी स्थानके ‘पादरी’ रोजनपर धर्मान्तरणके आरोप लग चुके हैं । तब ७० बच्चोंके नामके आगे धर्मके स्थानपर ईसाई लिख दिया गया था और इन सभी ७० बच्चोंके पिताके नामके आगे एक ही व्यक्तिका नाम था, रोशन क्रिश्चन । इस प्रकरणमें जांच समिति बनाई गई थी, जिसने अबतक कोई भी कार्रवाही नहीं की । सेवाधाम आश्रमके संचालनकी मान्यता एक वर्ष पूर्व ही निरस्त हो चुकी है । इसका आधिपत्य (लीज) भी बहुत समय पूर्व समाप्त हो गया है ।
एक अन्य समाचारके अनुसार मध्य प्रदेशके बडवानी जनपदमें लोभ दिखाकर धर्मान्तरण करानेके आरोपमें पति-पत्नीको ‘पुलिस’द्वारा बन्दी बनाया गया । आदिवासी महिलाओंको ईसाई धर्म अपनानेके लिए प्रलोभन दिया जा रहा था, उनके विरुद्ध धर्मान्तरण विरोधी अधिनियमके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । राजपुर ‘थाना’ प्रभारी राजेश यादवके अनुसार,  नवलपुरा गांवके निवासी ३५ वर्षीय अनार सिंह जमरे और ३२ वर्षीया उसकी पत्नी लक्ष्मी जमरे, दोनों आरोपी हैं । इस दम्पतिपर मदिल गांववासी प्रकाश चौहानने आरोप लगाकर ‘पुलिस’में परिवाद किया और इसी आधारपर मध्य प्रदेश धर्म स्वतन्त्रता अधिनियमके अन्तर्गत उन्हें बन्दी बनाया गया कि वे आदिवासी महिलाओंको अपने घरपर बुलाकर, उन्हें धन, नि:शुल्क शिक्षा, निशुल्क औषधि, कार्य तथा अन्य सुविधाओंका लोभ देते हैं और उन्हें ईसाई धर्म अपनानेके लिए कहते हैं । आरोपियोंसे, धर्म परिवर्तनसे सम्बन्धित साहित्य, ‘पेन ड्राइव’ तथा अन्य सामग्रियां भी ‘पुलिस’ने अपने अधिकारमें ले लीं । राजपुर ‘थाना’ प्रभारीने यह भी बताया कि स्थानीय न्यायालयद्वारा आरोपियोंको, प्रतिभूति (जमानत) दिए जानेके पश्चात स्वतन्त्र कर दिया गया; यद्यपि मध्य प्रदेशमें धर्म स्वतन्त्रता अधिनियमन २०२० के अन्तर्गत, विवाह या किसी भी अन्य माध्यमसे बलपूर्वक धर्मान्तरण करानेपर आरोपीको १० वर्षोंतके कारावास तथा एक लाख रुपएतकके आर्थिक दण्डका प्रावधान निश्चित किया गया है ।
     हिन्दुओंके लिए जितने हानिकारक म्लेच्छ जिहादी हैं, उनसे अधिक घातक ईसाई हैं; क्योंकि वे गुप्तरूप से अपना कार्य करते हैं । ऐसे तत्त्वोंसे सावधान रहना सभी हिन्दुओंका प्रथम कर्तव्य होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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