भगवानके द्वारमें चोरी करना है अक्षम्य पाप !


कुछ समय पहले मध्य प्रदेशके एक सुप्रसिद्ध मंदिरमें गई थी तो मैंने देखा कि वहां स्टीलके लोटे, थाली और अन्य पूजन पात्र रखे हुए थे | मुझे रुद्राभिषेक करना था, मैंने वहांके पुरोहितसे पहले ही समय ले रखा था और वहां मैं प्रथम बार ही गई थी ! मैंने पुरोहितजीसे कहा, ये सब तो लोहेके पात्र हैं, क्या पीतल या ताम्बाके पात्र नहीं है तो वे हंसने लगे बोले भक्त चुराकर ले जाते हैं इसलिए अब स्टीलके पात्र रखे जाते हैं ! मूर्ख हिन्दुओ, कमसे कम मंदिरमें तो चोरी करना छोड दो, भगवानके द्वारमें ऐसा करना अक्षम्य पाप है ! इस सबका मूल कारण हिन्दुओंको धर्मशिक्षण न मिलना है ! आज यदि हिन्दू धर्मनिष्ठ होता तो वह ईश्वरसे भय तो करता ! स्वतन्त्रता पश्चात ये कैसे भारतका निर्माण कर रहे हैं हम ! 



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