४५ वर्षोंसे बन्द है राजस्थानका देवनारायण मन्दिर, मुसलमानोंने प्रविष्ट कर रखा है प्रतिवाद, खुलवानेके लिए हिन्दुओंका प्रदर्शन


१५ मार्च, २०२२
      भीलवाडाके हिन्दुओंकी मांग है कि ४५ वर्षोंसे बन्द देवनारायण मन्दिरको खोला जाए और उसमें पूजा-अर्चना की जाए । सोमवारको (१४ मार्च २०२२ को) सवेरे १० बजे माण्डलमें मेजा मार्ग स्थित तेजाजी चौकसे प्रदर्शनकारी पदयात्रापर निकले । गुर्जर समाज सहित हिन्दू समुदायके विभिन्न लोगोंने माण्डल उपनगरके (कस्बेके) इस मन्दिरको खुलवानेके लिए १७ किलोमीटर विस्तृत मार्च निकाला।
    वास्तवमें, एक कार्यक्रममें मंचसे ‘पुलिस’ और प्रशासनकाे चुनाैती देनेके पश्चात गाेपालसिंह गुर्जर बस्सी नामके युवकने ११ मार्च २०२२ काे माण्डलमें ४५ वर्षसे बन्द पडे देवनारायण मन्दिरके ताले ताेड दिए थे । युवकने कहा कि वह ताला तोडकर स्वयंको सौभाग्यशाली मान रहा हैं ।
      बता दें कि १९७७ से ही इस मन्दिरकी भूमि विचाराधीन है और न्यायालयने इसमें ताला लगवाकर कुंजी माण्डल ‘थाने’में जमा करवा दी थी । ‘पुलिस’का कहना है कि इस भूखण्डमें एक ढांचा है, जिसपर दूसरे ‘मजहब’का ‘दावा’ है ।
       गुर्जर समाजका यह पग प्रसंशनीय है; क्योंकि उपर्युक्त प्रकरणमें न्यायलय मूकदर्शक प्रतीत हो रहा है । यह १९७७ नहीं, २०२२ है; अतः दीर्घकालसे लम्बित इस अभियोगमें अब शीघ्र न्याय हो, इस हेतु न्यायिक प्रक्रिया तीव्र हो, ऐसा हिन्दू समझाको अपेक्षित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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