भोजन करते समय भोजनपर ध्यान रहनेके कारण, भोजन कैसा है, भोजनमें मेरे रूचिका व्यंजन है या नहीं, इस प्रकारके विचार मनमें आते हैं और वृत्ति बहिर्मुख रहती है। भोजनमें यदि कोई व्यंजन अच्छा न हो तो उसके कारण भोजन करते समय मनमें नकारात्मक विचार आते हैं, कभी-कभी वह व्यक्त हो जाता है जिस कारण दुसरेके मनको दुःख होता है। इसके विपरीत भोजनका सेवन करते समय नामजप करते रहनेसे मन अंतर्मुख होता है फलस्वरूप भोजन कैसा है यह सब विचार मनमें नहीं आता है इसके विपरीत भगवानने भोजन दिया, यह सोच कर मनमें कृतज्ञताके भाव निर्माण होते हैं; अतः भोजन कैसा भी हो वह अच्छा लगता है और भोजन करते हुए नामजप करते रहनेसे साधनाका समय भी व्यर्थ नहीं जाता है ! – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले(३०.९.२०११)
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