शिक्षिका सदफ जहांने श्रीमद्भगवत गीताकी पुस्तकको कचरेमें फेंक हिन्दू देवी-देवताओंको कहे अपशब्द


१२ दिसम्बर, २०२१
             बिहारके गया जनपदमें चौथी कक्षामें पढनेवाले १ बच्चेने अपनी मुसलमान महिला अध्यापिकापर श्रीमद्भगवद्गीताको कचरेमें फेंकने और हिन्दू देवी-देवताओंको अपशब्द कहनेका आरोप लगाया है । प्रकरणका चलचित्र भी सामाजिक जालस्थलपर साझा हो रहा है । पीडित छात्र गया स्थित ‘इस्कॉन’ मन्दिरके पुजारीका पुत्र है । साझा हो रहे दृश्यपटोंमें बच्चा अध्यापिकाका नाम सदफ जहां एवं प्रभारी प्रधानाचार्यका नाम अमीना खातून बता रहा है । दृश्यपटमें बालक कह रहा है कि वह जब ९ दिसम्बरको विद्यालय गया तो अल्पाहारके पश्चात अध्यापिका सदफ जहां आई । वह हमें हिन्दी पढाती हैं एवं साथमें उर्दू भी पढाती हैं । तब सभीके ‘बैग’की जांचकी जा रही थी । मैं प्रतिदिन भगवद्गीता व माला लेकर विद्यालय जाता था । जांचके मध्य मेरे ‘बैग’से जब भगवतगीता निकली तो अध्यापिका सदफने उसे ‘डस्टबिन’में फेंक दिया और हिन्दू देवी देवताओंको अपशब्द कहने लगी ।
      अध्यापिकाने बच्चेको धमकी देते हुए यह भी कहा कि उसने यह बात यदि किसीको बताई तो वह उसकी ‘चमडी उधेड’ देगी । उनकी पादुकाओंके ऊपर भी बच्चेको गणेशजीका चित्र बना हुआ दिखा ‌। ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार, विद्यालयका नाम केन्द्रीय विद्यालय-१ है एवं कक्षा चारमें पढनेवाले छात्रके परिवादका क्षेत्रीय कार्यालयने संज्ञान लिया है । विद्यालयकी प्रभारी प्रधानाचार्य अमीना खातूनके अनुसार, आरोपी शिक्षिका उनके यहां अस्थाई (पार्ट टाइम) रूपसे पढाती है एवं सत्य उजागर होनेपर वह नियम अनुसार कार्यवाही अवश्य करेंगी । वहीं बच्चेके पिता पुजारी राहुल सिंहने बताया कि पूर्वमें विद्यालयमें यह सब कार्य अल्प होते थे; परन्तु जबसे विद्यालयकी उप-प्रधानाचार्य अमीना खातूनको प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है, तबसे यहां अस्थाई शिक्षक-शिक्षिकाओंमें मुसलमानोंकी संख्यामें तीव्र वृद्धि हुई है ।
       यदि यहां जिहादियोंके समुदायकी धार्मिक पुस्तकोंका अनादर हुआ होता तो आज सम्पूर्ण गया जनपदके मार्गोंपर उग्र प्रदर्शन हो रहे होते एवं हिन्दुओंका जीवन वहां दुश्वार हो गया होता; परन्तु यहां पीडित हिन्दू है; इसलिए वह उपेक्षित है । अब सभी हिन्दू संगठित हो एवं ऐसे आसुरी कुकृत्योंका न्यायिक मार्गसे उचित उत्तर दें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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