अम्बेडकरके पोतेने आतंकी संगठनसे की संघकी तुलना !


जनवरी २९, २०१९

संविधान निर्माता भीम राव अम्बेडकरके पोते प्रकाश अम्बेडकरने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघको लेकर विवादित वक्तव्य दिया है । भारिप बहुजन महासंघके अध्यक्ष प्रकाश अम्बेडकरने संघकी तुलना आतंकवादी संगठनसे की है । मुम्बईके उपनगर कल्याणकी एक जनसभामें प्रकाश अम्बेडकरने कहा कि संघवाले शस्त्र पूजा करते हैं, ऐसा केवल आतंकवादी करते हैं । जब देशमें पुलिस है, सेना है तो किसी संगठनको शस्त्र रखने और उसकी पूजा करनेकी क्या आवश्यकता है ?

प्रकाशने कहा कि बाबासाहेबने संविधान लिखकर इतिहास रचा, दलित समाजको भी प्रकाशको वोट देकर संसदमें भेजना होगा, ताकि दलित और सशक्त हो सकें ।
प्रकाश इससे पूर्व भी विवादित वक्तव्य दे चुके हैं । उन्होंने कहा था कि जो लोग वंदे मातरम बोलते हैं, वे राष्ट्र विरोधी हैं । राष्ट्रगानके (जन गण मन) होते हुए भी वंदे मातरमकी क्या आवश्यकता है ?

प्रकाश जिस जनसभामें ये बातें कह रहे थे, वहां ‘एआईएमआईएम’ नेता असदुद्दीन ओवैसी भी थे । यहां योगगुरु रामदेवके पश्चात अब ‘एआईएमआईएम’ नेता असदुद्दीन ओवैसीने भारत रत्नको दिए जानेको लेकर प्रश्न किए है । ओवैसीका कहना है कि अभीतक कितने दलित, आदिवासियों और निर्धन ब्राह्मणोंको दिया गया है ? महाराष्ट्रके कल्याणमें रैलीके समय ओवैसने कहा, “मुझे ये बताओ कि जितने भारत रत्नके सम्मान दिए गए, उसमेंसे कितने दलित, आदिवासी, मुसलमान, गरीबों, ऊंची जातियों और ब्राह्मणोंको दिए गए ?” ओवैसी यहां प्रकाशके लिए वोट मांग रहे थे ।

ओवैसीने भीम राव अम्बेडकरको भारत रत्न दिए जानेको भी विवशता बताया । उन्होंने कहा, “बाबा साहबको भारत रत्न दिया गया; परन्तु हृदयसे नहीं दिया गया, विवशतामें दिया ।”

 

“प्रकाशको ईश्वरका धन्यवाद करना चाहिए कि संघ केवल स्वरक्षण हेतु शस्त्र पूजा करते है ! यदि चलाते तो वन्दे मातरमको न गानेकी कहनेवाले राष्ट्रद्रोही इस राष्ट्रमें पोषित होते क्या ? ऐसे आतंकी समान नेता भारतमें पोषित ही इसलिए हो रहे हैं; क्योंकि हममें राष्ट्राभिमान नहीं है और ऐसे लोग उन्हीं आतंकियोंके दलालोंके रूपमें कार्यरत हैं, जो शस्त्र पूजा तो नहीं करते हैं वरन उसे निर्दोष हिन्दुओंको मारनेके लिए प्रयोग करते है ! भारत शासन प्रकाश अम्बेडकरपर कठोरसे कठोर कार्यवाही कर उन्हें उसी देशमें भेजे जहां इन्हें वास्तविक आतंकी संगठनकी परिभाषा सिखनेको मिले ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : भास्कर



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