जून १२, २०१८
ब्रिटेनके एक न्यायाधीशने १९८४ के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’से सम्बन्धित लिखित -पत्रको सार्वजनिक करनेका आदेश दिया है, ताकि इस घटनामें ब्रिटिश सरकारकी भागीदारी और स्पष्ट हो सके । साथ ही न्यायालयने ब्रिटिश शासनका इस तर्कको नकार दिया कि इसके चलते भारतके साथ राजनयिक सम्बन्धोंको हनि पहुंचेगी ! लन्दनमें मार्चमें ‘फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल’की (सूचना अधिकार) त्रिदिवसीय सुनवाईकी अध्यक्षता करने वाले न्यायाधीश मुरी शैक्सने सोमवारको (११ जून) कहा कि उस समयके अधिकतर लिखित -पत्र (फाइलें) अवश्य ही सार्वजनिककी जानी चाहिए !
उन्होंने ब्रिटिश शासनका इस तर्कको नकार दिया कि ‘डाऊनिंग स्ट्रीट’के लिखित -पत्रोंको सार्वजनिक करनेसे भारतके साथ राजनयिक सम्बन्धोंको नुकसानहानि पहुंचेगी; यद्यपि, न्यायाधीशने स्वीकार किया कि ब्रिटेनकी संयुक्त गुप्तचर समितिके पास विद्यमान ‘इण्डिया: पॉलीटिकल’ नाम की एक लिखित -पत्रमें (फाइल) कुछ ऐसी सूचना हो सकती है, जो ब्रिटिश गुप्तचर विभाग – एमआई ५ एमआई ६ और शासन संचार मुख्यालयसे जुडी हो । न्यायाधीशके आदेशमें कहा गया है, ‘‘हम जिस अवधिकी बात कर रहे हैं, वह भारतके वर्तमान इतिहासमें एक बहुत ही संवेदशील समयका है ।
यह भी याद रखना चाहिए कि ३० वर्ष चले गए हैं ।’’ नियमोंके अनुसार इस तरहके लिखित -पत्रोंको वहां ३० वर्षके बाद ही सार्वजनिक किया जा सकता है । वर्ष २०१४ में ब्रिटेन शासनने कुछ लिखित -पत्र सार्वजनिक किए थे, जिससे इस बातका प्रकटीकरण हुआ था कि ब्रिटिश सेनाने ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’से पहले भारतकी सेनाको परामर्श दिया था ।
‘यूके कैबिनेट कार्यालय’को ‘फर्स्ट टियर ट्रिब्यूनल’के निर्णयके विरुद्ध विनतीके लिए ११ जुलाई तकका समय दिया गया है । उसे सम्बद्ध लिखित -पत्र अध्ययनके लिए १२ जुलाई तक स्वतन्त्र पत्रकार फिल मिलरको उपलब्ध कराने होंगे । मिलर अमृतसरके स्वर्ण मन्दिरमें किए गए अभियानमें मार्गरेट थैचर नीत तत्कालीन सरकारद्वारा थल सेनाको (भारतीय) दी गई सहायताकी प्रकृतिकी जांच कर रहे हैं ।
स्रोत : जी न्यूज
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