प्रचलित चुनाव प्रक्रियामें अच्छे-बुरेका अभिज्ञान(पहचान) कैसे करें ?


स्वतंत्रताके पश्‍चात ६६ वर्ष भारतपर राज्य करनेवाले लोकतंत्रके कारण समाज, राष्ट्र और धर्मका परम अधोगति हुई है । लोकतंत्रकी प्रचलित चुनाव प्रक्रियाने समाज, राष्ट्र और धर्मका उत्कर्ष करनेवाला एक भी राज्यकर्ता नहीं दिया, यह एक भीषण सत्य है । चुनावोंके माध्यमसे कुछ साध्य नहीं होता; किंतु सर्पसे भला बिच्छू ! इस सिद्धांतके अनुसार लोकप्रतिनिधि चुने जाते हैं ।
ऐसे राज्यकर्ता राष्ट्रका सर्वंकष उत्कर्ष क्या साध्य करेंगे ? छत्रपति शिवाजी महाराजने चुनाव जीतकर हिंदु राष्ट्र स्थापित नहीं किया अथवा पेशवाआेंने भी चुनाव जीतकर अटकके पार झंडे नहीं फहराए। हिंदुओ, निम्न उदाहरणोंसे यह ध्यानमें रखे कि किसी भी राजनीतिक दलद्वारा चुनाव जीतनेपर देशकी तथा हिंदुआेंकी दुःस्थितिमें परिवर्तन आनेवाला नहीं है, अतः चुनावोंकी निरर्थकता जानकर हिंदु राष्ट्रकी स्थापना हेतु सक्रिय हो जाएं !
अनेक लोगोंके मनमें यह प्रश्‍न उठेगा कि चुनावोंमें मत किसको दिया जाए ? तो जो प्रत्याशी राष्ट्रप्रेमी और धर्मप्रेमी हैं, साथ ही जो भ्रष्टाचार नहीं करते तथा चारित्र्यसंपन्न भी हैं, ऐसे प्रत्याशियोंको चाहे वे किसी भी पक्षके हो, उन्हें ही अपना मत दें । अपना मत, कदापि व्यर्थ न होने दें ।
१. भ्रष्टाचार
१ अ. कांग्रेस : बोफोर्स घोटाला, दूरसंचार उपकरण घोटाला, आदर्श घोटाला, राष्ट्रकुल घोटाला, टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, कांग्रेसद्वारा किए इन घोटालोंकी यह सूची बडी है । इसीलिए कहा जाता है कि, कांग्रेस भ्रष्टाचारकी गंगोत्री है ।
१ आ. भाजप : जैन हवाला प्रकरण, शवपेटी घोटाला, कर्नाटक खान घोटाला इत्यादि घोटाले, साथ ही बंगारू लक्ष्मणको भाजपाके अध्यक्षपदपर रहते समय घूस लेते हुए पकडे जानेसे और नितिन गडकरीको भी भाजपाका अध्यक्षपद भ्रष्टाचारके आरोपोंके कारण छोडना बंधनकारी होना, ये उदाहरण भाजपा भ्रष्टाचारमें कांग्रेसके बंधु होनेका ठोस प्रमाण हैं । कर्नाटकके भाजपके भूतपूर्व मुख्यमंत्री येडीयुरप्पाको भ्रष्टाचारके कारण मुख्यमंत्रीपद त्यागना पडा ।
१ इ. समाजवादी दल : अनाज घोटाले जैसे घोटाले और समाजवादी पक्षके अध्यक्ष मुलायम सिंहकी चल-अचल संपत्ति इत्यादि ।
१ ई. बहुजन समाजवादी दल : ताज कॉरीडोर जैसे घोटाले और बहुजन समाजवादी पक्षकी अध्यक्षा मायावतीकी चल-अचल संपत्ति इत्यादि ।
१ उ. राष्ट्रवादी कांग्रेस : लवासा सिटी, सिंचन घोटाला, भुदरगड राज्य सहकारी पतसंस्था घोटाला, महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला इत्यादि घोटाले ।
१ ऊ. राष्ट्रीय जनता दल : चारा घोटाला जैसे घोटाले और राष्ट्रीय जनता दलके अध्यक्ष लालूप्रसाद यादवकी चल-अचल संपत्ति इत्यादि ।
२. अपराध करनेकी वृत्ति
विद्यमान लोकसभाके ५४३ सांसदोंमेंसे १५३ सांसदोंपर अपराधी कृत्य करनेके प्रकरणोंमें अभियोग चल रहे हैं । अपराधी वृत्तिके ये सांसद सर्व दलोंके हैं ।
३. मुसलमानोंकी चापलूसी
३ अ. कांग्रेस : मुसलमानोंका राष्ट्रीय संपत्तिपर पहला अधिकार है, ऐसा प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंहने सार्वजनिकरूपसे घोषित किया । सच्चर अहवाल, अल्पसंख्यक मंत्रालयकी निर्मिति, हज यात्राके लिए करोडों रुपयोंका अंशदान, कांग्रेसने किए मुसलमानोंके तुष्टिकरणके ये वर्तमानके कुछ उदाहरण हैं ।
३ आ. भाजपा : मुसलमानोंके तुष्टिकरणके लिए पक्षध्वजके रंगमें हरा रंग लानेसमान भाजपाके मुसलमानप्रेमी कृत्य सभीको ज्ञात हैं ।
३ इ. समाजवादी दल : यह दल उत्तरप्रदेशके मुसलमानोंपर वर्तमानमें सुविधाआेंका वर्षाव कर रहा है । देहलीकी जामा मस्जिदके इमाम इस दलके ध्वजवाहक हैं ।
३ ई. अन्य सर्व दल : राज्यमें इनकी सरकार आनेपर कांग्रेसकी भांति ही मुसलमानोंका तुष्टिकरण करते हैं ।
४. ईसाइयोंकी चापलूसी
ईशान्य भारतके ईसाइयोंकी धार्मिक और विभाजनवादी कार्यवाहियोंपर प्रतिबंध न लाना अथवा उसके लिए आग्रह न करना, साथ ही भारतमें धर्मपरिवर्तन-विरोधी कानून न करना, सर्वपक्षीय राज्यकर्ताआेंद्वारा की जा रही चापलूसीका यह उत्तम उदाहरण है ।
५. हिंदुद्वेष
सर्व राजनीतिक दल हिंदुद्वेषसे ग्रस्त होनेके कारण ही भारतमें समान नागरी कानून, गोहत्याप्रतिबंधक कानून इ. हिंदुहितके कानून नहीं बनाए गए । केंद्रमें और राज्यमें सरकार किसी भी दलकी हो, पुलिस और प्रशासन हिंदुआेंके साथ ही भेदपूर्ण व्यवहार करते हैं, ऐसा सार्वत्रिक अनुभव है ।
६. मंदिरोंका अधिग्रहण
६ अ. कांग्रेस : आंध्रप्रदेश और कर्नाटक इन राज्योंमें कांग्रेसने मंदिर अधिग्रहण कानून बनाया, तो महाराष्ट्रमें तुलजापुरके श्री भवानीदेवीके मंदिर, पंढरपुरके श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर, मुंबईके श्री सिद्धिविनायक मंदिर और शिर्डीके श्री साईबाबा संस्थानका अधिग्रहण किया ।
६ आ. भाजप : उच्च न्यायालयद्वारा कर्नाटकमें मंदिर अधिग्रहण कानून निरस्त किए जानेपर, भाजपा जब सत्तामें आई तो उसे पुनः लागू कर दिया ।
६ इ. माकप : केरलमें मंदिर अधिग्रहण कानून लागू किया ।
तात्पर्य, सर्व राजनीतिक दल एक ही मालामें पिरोए मोती हैं ।
– परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले (१७.४.२०१३)


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