‘फैबइंडिया’ने ‘जश्न-ए-रिवाज’वाला संग्रह (कलेक्शन) लौटाबलिया, हिन्दू त्योहारके ‘इस्लामीकरण’पर ‘नेटिजन्स’ने लगाई थी लताड


१८ अक्टूबर, २०२१
      पारम्परिक परिधानोंका व्यापार करनेवाले ‘फैबइंडियाने (Fabindia)’ दीपावलीके अवसरपर प्रकाशित किए गए संग्रहको ‘जश्न-ए-रिवाज’का नाम दिया है । हिन्दुओंके त्योहारको इस प्रकारसे उर्दूमें प्रस्तुत ‘फैबइंडिया’ने अपने ‘ट्वीट’में भी किया था, जिसे अब वह ‘डिलीट’ कर चुके हैं । ‘नेटीजन्स’के भारी विरोधके पश्चात इस ‘ट्वीट’को हटाया गया । वहीं, अब समाचार आ रहा है कि ‘फैबइंडिया’ने लोगोंके भारी विरोधको देखते हुए यह विज्ञापन हटा लिया है ।
      ‘फैबइंडिया’ने लिखा था, “जैसा कि हम प्रेम और प्रकाशके त्योहारका स्वागत कर रहे हैं । ‘जश्न-ए-रिवाज’ फैबइंडियाका संग्रह है, जो अत्यधिक सुन्दरतासे अपना सम्मान भारतीय परम्पराको देता है ।”
      इस ‘ट्वीट’में ‘जश्न-ए-रिवाज’ शब्दको देख ‘यूजर्स’ भडक गए । ‘भाजपा’ युवा मोर्चाके राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्याने घटनाके विषयमें लिखा, दीपावली कोई ‘जश्न-ए-रिवाज’ नहीं     है । हिन्दू त्योहारका ‘इब्राहिमीकरण’, ऐसी ‘मॉडलों’का प्रदर्शन जिन्होंने हिन्दू परिधान न पहने हों, सबका बहिष्कार होना चाहिए और ‘फैबइंडिया’  समाचार  जैसे  ‘ब्रांड’को  ऐसी  चेष्टाके
(हरकतके) लिए आर्थिक क्षतिपूर्ति करनी चाहिए ।
      इसके पश्चात, एक ‘यूजर’ने इस प्रकारकी चेष्टा, हिन्दू त्योहारोंका ‘इस्लामीकरण’ कहा । कई ‘यूजर्स’ने प्रण लिया कि वे पुनः इस ‘ब्रांड’की वस्तु क्रय नहीं करेंगे ।
       ‘फैबइंडिया’ जैसे ‘ब्रांड’का, जो धनार्जन हेतु हिन्दू धर्मकी आस्थाके साथ खिलवाड करते है, सार्वजनिक रूपसे सभी हिन्दुओंको त्याग करना चहिए । वर्तमान कालमें हिन्दुओंको संगठित होकर, ऐसे हिन्दू द्रोहियोंका व्यापार नहीं चलने देना चाहिए, जिससे उन्हें समझमें आए कि भारतमें रहकर ऐसा षड्यन्त्र नहीं चलेगा ।  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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