‘कश्मीरी मुसलमानोंने, रांंचीके मुसलमानोंंके साथ मिलकर हिन्दुओंको पीटा’


२९ नवम्बर, २०२१
         झारखण्डके रांंचीमें स्थानीय लोगों और कश्मीरके मुसलमानोंके मध्य विवादमें ‘आपसी समझौते’से प्रकरणको समाप्त करनेका समाचार आ रहा है । इस प्रकरणका शान्तिपूर्ण रूपसे दोनों पक्षोंने ‘आपस’में समाधान निकाल लिया है । किसीपर प्राथमिकी प्रविष्ट नहीं की गई है ।
        एक सार्वजनिक दृश्यश्रव्यके आधारपर कुछ स्थानीय युवकोंपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कश्मीरके मुसलमानोंंपर आक्रमणकर, उन्हें जय श्रीराम बोलनेके लिए विवश किया था । आरोप था कि २७ नवम्बर २०२१, शनिवारको प्रातः २ ‘दर्जन’ युवकोंने कश्मीरी मुसलमानोंपर प्रकरणमें लाठी डण्डेका भी प्रयोग किया गया । घायलोंके नाम रियाज अहमद वानी, तनवीर अहमद साह, सरफराज अहमद वानी और गुलाम अहमद बताए गए थे । कुछ समाचारोंमें ३ लोगोंको बन्दी बनाए जानेकी सूचना है । इनके नाम दीपक झा, तरुण कुमार और अरविंद कुमार बताए गए । इनपर जय श्रीरामके उद्घोष लगवानेके साथ पाकिस्तान ‘मुर्दाबाद’ बुलवानेका भी आरोप लगाया गया ।
        पाञ्चजन्यके अनुसार, यह विवाद तरुण कुमारकी मोटरसाईकिल और कश्मीरी व्यापारियोंका ठेला टकरानेके चलते हुआ था । तरुण कुमारको वहांं खडे कश्मीरी मुसलमानोंने पीटना आरम्भ कर दिया तो तरुणके बचावमें भी दीपक झा और अरविन्द कुमार आ गए । इस मध्य ‘पुलिस’ने पहुंंचकर प्रकरणमें मध्यस्थता की । समूचे प्रकरणमें तरुण कुमारने भी ‘पुलिस’को प्रार्थनापत्र देकर, कश्मीरी मुसलमानोंद्वारा स्वयंपर आक्रमणका आरोप लगाया था । प्रार्थनापत्रमें तरुण कुमारने लिखा है कि ‘कश्मीरियोंने रिक्शा सडकपर खडा किया हुआ था । मैंने उन्हें हटानेको कहा, तब उन्होंने एकत्रित होकर मेरे साथ ‘गाली-गलौज’ और मारपीट आरम्भ कर दी । इसीके साथ उन सभीने चलभाष करके स्थानीय मुसलमानोंको एकत्रित कर लिया । उन्होंने मुझे मारना आरम्भ कर दिया था । मेरी ओरसे मुझे बचाने मेरे २ मित्र आए । यदि ‘पुलिस’ समयपर न आती तो मेरे प्राणोंपर सङ्कट था । इसीके साथ तरुणने रियाज, बिलाल, तनवीर, सरताज और उनके अन्य सहयोगियोंपर कार्रवाहीकी मांंग की है ।
        एक स्थानीय ‘न्यूज पोर्टल’ झारखंड समाचारके अनुसार, महावीर मण्डल नामके संगठनने इस घटनाको प्रपञ्च बताया था । उनके अनुसार, जिस जनपदमें सैकडों कश्मीरी रहते हों, वहांं इन्हीं चारसे ही कोई मारपीट क्यों करेगा ? इसी प्रतिवेदनमें बताया गया है कि कुछ दिवस पूर्व इन्हीं चार कश्मीरी मुसलमानोंके साथ कोई और घटना घटित हुई थी । उन्होंने ‘पुलिस’ प्रशासनसे इस प्रकरणमें निष्पक्षतापूर्वक जांंच करनेको कहा था ।
       स्वयंको अल्पसंख्यक कहनेवाले यदि आज इतने उग्र हैं तो इनकी संख्या बढनेपर तो निश्चित ही ये हिन्दुओंको जीवित नहीं रहने देंगे; अतः हिन्दुओ ! स्वयंकी रक्षाके लिए संगठित होइए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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