दिसम्बर ३, २०१८
राजस्थानमें गत वर्ष पाठ्यक्रममें परिवर्तन करते हुए अकबरके आगे लगे शब्द ‘महान’को हटा दिया गया था । साथ ही महराणा प्रतापके नामके आगे ‘महान’ शब्द लगाया गया था । इसके अतिरिक्त यह भी लिख दिया गया था कि हल्दीघाटीके युद्धमें अकबर नहीं, वरन महराणा प्रताप विजयी हुए थे । अब शासन परिवर्तन हुआ तो राज्यके शिक्षा मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासराने कह दिया कि समूचे पाठ्यक्रमकी समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि महाराणा प्रताप और अकबरमें कौन महान था ? डोटासराने कहा, “अब नूतन शासन बना है, तो सभी पाठ्यक्रमोंकी समीक्षा की जाएगी । मेरे मानने या नहीं माननेसे क्या होता है ?”
भाजपाने इसपर राज्यभरमें प्रदर्शन किए हैं । गुरुवार, ३ जनवरीको हुई सामूहिक समाचार वार्तामें राज्यके पूर्व शिक्षा मन्त्री वासुदेव देवनानीने कहा कि अब इस प्रकरणमें मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत वक्तव्य दें कि अकबर और महराणा प्रतापमें कौन महान है ? देवनानीने आरोप लगाया कि अकबरके कृत्य ऐसे थे कि कांग्रेस दोनोंको महान बनानेका दुस्साहस नहीं कर सकती है, इसलिए किसी एकको महान बनाना होगा !
उन्होंनें आरोप लगाया कि मुस्लिम तुष्टीकरणके लिए कांग्रेस अपने वीरोंका अपमान कर रही है । देवनानीने कहा कि २००४ में कांग्रेसने पाठ्यक्रमोंमें परिवर्तन किया था । पाठ्यक्रमोंमें राम जैसे शब्द तकको हटा दिया था ।
अब मुख्यमन्त्री गहलोतको उत्तर देना चाहिए कि महराणा प्रताप महान थे या अकबर महान थे ? इस बारके विधानसभा मतदानमें राजपूतोंका विरोध भाजपाको भारी पडा था । राजपूतोंको भाजपाका परम्परागत ‘वोट बैंक’ माना जाता है ।
“तुष्टिकरणकी नीतिमें कांग्रेसको क्या सहस्रों हिन्दुओंकी निर्मम हत्या करनेवाले, महिलाओंसे दुष्कर्म करनेवाले नृशंस हत्यारे अकबर व राजाओंके राजा वीर प्रतापमें अन्तर समज नहीं आता है ? पूर्वमें भी कांग्रेसद्वारा ये कृत्य किए जा चुके हैं, जिसका परिणाम अनुचित संस्कारोंके रूपमें देशके युवाओंमें पडा है और यह इस हिन्दू बहुल राष्ट्रकी विडम्बना है कि धर्मशून्य हिन्दू अपने वीरोंका अपमान होते हुए भी देख सकते हैं !!”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : आजतक
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