बेंगलुरु ‘रेलवे स्टेशन’पर ‘कुलियों’के लिए बनाए गए विश्राम स्थलको बनाया गया था ‘नमाज’ स्थल, विरोधके उपरान्त पुनः बनाया गया विश्रामगृह
१ फरवरी, २०२२
‘सोशल मीडिया’पर बेंगलुरू ‘रेलवे स्टेशन’के एक सार्वजनिक दृश्यपटको लेकर सोमवारको हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा विरोध प्रकट किया गया था । इस दृश्यपटके अनुसार, बेंगलुरु ‘स्टेशन’के ‘प्लेटफॉर्म’ संख्या ५ पर स्थित ‘पोर्टर रूम’में (कुलियोंके विश्रामके लिए बनाया गया कक्षमें) ‘नमाज’ पढनेकी व्यवस्था की गई थी । बता दें कि कक्षके एक भागको, जंहा ‘नमाज’ पढी जाती थी, उसे पृथक रूपसे घेरा गया था ।
सोमवारको हिन्दू जनजागृति समितिने इस घटनाका विरोध करते हुए ‘रेलवे’ अधिकारियोंसे भेंट की और तत्काल कार्यवाही करनेकी मांग की । वार्ताके लिए उपलब्ध अधिकारियोंने इस विषयकी जांचकर उचित कार्यवाहीकी बात कही थी, जिसपर क्रियान्वयन करते हुए उस कक्षको पुनः विश्रामगृहमें परिवर्तित कर दिया गया है ।
हिन्दू जनजागृति समितिके प्रवक्ता मोहन गौडाने कहा था, “यदि ७ दिनोंके भीतर इस घटनापर उचित कार्यवाही नहीं होती है तो वे इस विषयको लेकर समिति आन्दोलन करेगी । यह एक बहुत ही गम्भीर विषय है और राष्ट्रीय सुरक्षाके दृष्टिकोणसे घातक है । बेंगलुरु ‘केएसआर रेलवे स्टेशन’ राज्यका एक महत्त्वपूर्ण ‘स्टेशन’ है । ‘रेलवे स्टेशन’के आसपास भले ही कई ‘मस्जिदें’ हैं; किन्तु ‘प्लेटफॉर्म’पर ‘नमाज अदा’ करनेकी अनुमति देना एक षड्यन्त्र लगता है । पत्रमें कहा गया है कि ‘रेलवे स्टेशन’के भीतर ‘नमाज’ पढनेकी अनुमति देनेसे इस स्थानको ‘मस्जिद’में परिवर्तनकी मांगकी आशंका हो सकती है ।
पत्रमें आगे कहा है कि बेंगलुरुको आतङ्कवादी गतिविधियोंका ठिकाना बना दिया गया है, यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय जांच अधिकारियोंने (एनआईएने) पश्चिम बंगालके आदिल असदुल्लाको २०१८ में बेंगलुरु छावनी ‘स्टेशन’से बन्दी बनाया गया । २०१९ में, ‘एनआईए’ने बेंगलुरुके ‘मैजेस्टिक एरिया’से (जहां रेलवे स्टेशन स्थित है) एक आतङ्कवादी, मोहम्मद अकरमको बन्दी बनाया गया था । ‘पुलिस’ने बांग्लादेशके एक आतङ्कवादी, ‘जमात-उल- मुजाहिदीन’के सदस्यको बनाया गया था, जो बेंगलुरुमें ‘कॉटनपेट मस्जिद’में छिपा था । पत्रमें यह भी कहा गया था कि यदि कोई कार्यवाही नहीं की गई तो कठोर विरोध किया जाएगा ।
साथ ही, इस विषयमें विश्व हिन्दू परिषदने भी विरोध प्रकटकर ‘रेल्वे’ अधिकारियोंको ज्ञापन भेजकर यह अवैध अतिक्रमण हटानेकी मांग की । श्री. विनोद बंसलने अपने ‘ट्विट’द्वारा इसकी जानकारी दी ।
जिहादियोंद्वारा यह अतिक्रमणका विस्तार है, जो अब सार्वजनिक शासकीय स्थलोंपर भी देखनेको मिल रहा है । उक्त प्रकरणका विरोध किया गया और सुखद परिणाम आया । ऐसी ही तत्परता अन्य प्रकरणोंमें भी रखनी होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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