२७ मई, २०२२
महाराष्ट्रकी आराध्य देवी मानी जानेवाली श्रीतुळजाभवानी माताका मन्दिर संस्थान शासकीय नियन्त्रणमें रहते वहां, वर्ष १९९१ से वर्ष २००९ की अवधिमें सिंहासन दानपेटीकी ‘नीलामी’में ‘करोडों’ रुपयोंका घोटाला हुआ है । इस सन्दर्भमें हिन्दू जनजागृति समितिने हिन्दू विधिज्ञ परिषदके माध्यमसे मुंबई उच्च न्यायालयके संभाजीनगर (औरंगाबाद) खण्डपीठमें प्रविष्ट की गई जनहित याचिकापर निर्णय देते समय माननीय न्यायालयने उक्त प्रकरणमें ‘सी.आई.डी.’के पूछताछ ब्यौरेमें अनेक गम्भीर निष्कर्ष सामने आए हैं ।
उस पूछताछ ब्यौरेके अनुसार, दानपेटी ‘नीलामी’में ८ कोटि ४५ लाख ९७ सहस्र रुपयोंका घोटाला हुआ है तथा उसमें दोषीके रूपमें ९ ‘नीलामी’ करनेवाले, ५ ‘तहसीलदार’, १ लेखापरीक्षक, १ धार्मिक सहव्यवस्थापकपर आरोप लगाया गया है तथा २० सितम्बर २०१७ को अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग, महाराष्ट्र राज्यको प्रस्तुत होकर ५ वर्ष हो रहे हैं, तब भी दोषियोंपर अभीतक कोई कार्यवाही नहीं की गई है । इस अवधिमें एक आरोपीकी मृत्यु हो चुकी है तथा घोटाला प्रारम्भ होकर ३१ वर्ष हो चुके हैं, तो क्या शासन अन्य आरोपियोंकी मृत्यु होनेकी प्रतीक्षा कर रहा है कि इसमें दोषी पाए गए अधिकारियोंको बचा रहा है ? अब तो महाराष्ट्र शासन गम्भीरता दिखाकर तत्काल दोषियोंपर प्राथमिकी प्रविष्टकर उन्हें बन्दी बनाए तथा उनसे देवस्थानकी लूटी गई राशि चक्रवृद्धि ब्याज लगाकर उगाही (वसूल) करे ! अन्यथा हिन्दू जनजागृति समितिको इसके लिए सडकपर उतरकर राज्यव्यापी आन्दोलन करना पडेगा तथा आवश्यकता पडनेपर न्यायालयमें जनहित याचिका प्रविष्ट करनी पडेगी, ऐसी चेतावनी हिन्दू जनजागृति समितिके महाराष्ट्र और छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवटने पत्रकार परिषदमें दी । इस समय पत्रकार परिषदमें हिन्दू विधिज्ञ परिषदके संस्थापक सदस्य तथा याचिका लडनेवाले अधिवक्ता (पू.) सुरेश कुलकर्णी उपस्थित थे ।
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