जिन देशोंमें ‘हिजाब’ प्रतिबन्धित है, उन स्थानोंपर आन्दोलन करके दिखाएं – टी. राजासिंह, ‘भाजपा’ विधायक, तेलंगाना


१ मार्च, २०२२
      भारतके एक राज्यमें ‘हिजाब’पर प्रतिबन्धका निर्णय आनेपर मुसलमान अस्थिरता फैला रहे हैं । ‘हिजाब’का निमित्तकर हिन्दुत्वकी अपकीर्ति कर रहे हैं । आनेवाले समयमें तो पूर्ण भारतमें ‘हिजाब’पर प्रतिबन्ध लगनेवाला है । तब वह क्या करनेवाले हैं ? ‘हिजाब’के प्रतिबन्धको हमारा पूर्ण समर्थन है । फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क, चीन, श्रीलंका आदि अनेक देशोंमें ‘हिजाब-बुरखा’ पूर्णतः प्रतिबन्धित है । वहां आन्दोलन करनेपर उलटा लटकाकर मारते हैं, उन स्थानोंपर जाकर आन्दोलनकर दिखाएं, ऐसी चुनौती तेलंगानाके ‘भाजपा’के हिन्दुत्वनिष्ठ विधायक श्री. टी. राजासिंहने दी है । वह हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा आयोजित ‘पहले हिजाब, फिर पूरी किताब ?’ इस ‘ऑनलाइन’ विशेष संवादमें बोल रहे थे ।
     इस समय सर्वोच्च न्यायालयके अधिवक्ता अश्‍विनी उपाध्यायने कहा, “संविधानके अनुच्छेद-३० के अनुसार, सम्बन्धित धर्मकी सीखमें बताए अनुसार विद्यार्थी विद्यालय एवं गुरुकुलमें अपने धर्मानुसार शिक्षा ग्रहणकर सकते हैं; परन्तु संविधानके अनुच्छेद-२१ के अनुसार विद्यालयोंका कार्य संचालन, नियम धर्मनिरपेक्षताके तत्त्वानुसार होते हैं; अतः सभी धर्मोंके विद्यार्थियोंको उनका पालन करना ही पडेगा । ऐसे स्थानपर मुसलमान छात्राओं ‘हिजाब’की मांग क्यों ? आज ‘हिजाब’, भविष्यमें वह विद्यालयोंमें ‘नमाज’ सहित अनेक मांगे करेंगे । संविधानका अनुच्छेद-२५ नागरिकोंको उनके धर्मका पालन करनेका अधिकार देता है तथा केन्द्र और राज्य शासनोंको यह अधिकार भी देता है कि जो अधर्म, अनीति, कुप्रथा आदिका अनुकरण करते हैं, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है, यह ध्यानमें रखना चाहिए ।
         क्या भारतकी समाचार वाहिनियां, वामपन्थी, तथाकथित बुद्धिजीवी एवं धर्मनिरपेक्ष लोग और विभिन्न राजनीतिक दल इन जिहादियोंकी अनैतिक एवं असंवैधानिक मांगोंके लिए इनकी आलोचना करेंगे ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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