कुतुब मीनारमें हिन्दू-जैन मन्दिरवाले आवेदन निरस्त, न्यायालयने कहा, “भूतकालकी त्रुटियां वर्तमानमें शान्ति भंगका आधार नहीं”
१० दिसम्बर, २०२१
देहलीके साकेत न्यायालयने कुतुब मीनारमें २७ हिन्दू और जैन मन्दिरोंको बनाए जानेवाले आवेदनको निरस्त कर दिया है । न्यायालयने आवेदन निरस्त करते हुए तर्क दिया कि “भूतकालमें की गई त्रुटियों वर्तमान या भविष्यकी शान्तिको भंग करनेका आधार नहीं हो सकतीं ।”
पूजा स्थल अधिनियम-१९९१ के प्रावधानोंके उल्लङ्घनको देखते हुए और सिविल प्रक्रिया संहिताके आदेश-७ नियम-११(ए) के अन्तर्गत आवेदन निरस्त किया गया । साकेत न्यायालयके सिविल न्यायाधीश नेहा शर्माने कहा, “भारतका इतिहास सांस्कृतिक रूपसे समृद्ध रहा है । इसपर कई राजवंशोंका शासन रहा । सुनवाईके मध्य, वादीके अधिवक्ताने (वकीलने) राष्ट्रीय ‘शर्म’के विषयपर प्रभावी तर्क रखे । किसीने भी मना नहीं किया है कि भूतकालमें त्रुटियांकी गई थीं; यद्यपि इस प्रकारकी त्रुटियां हमारे वर्तमान और भविष्यकी शान्ति भंग करनेका आधार नहीं हो सकतीं हैं ।”
एक ‘सोशल मीडिया यूजर’ने मन्दिर-‘मस्जिद’की बात करते हुए लिखा, “मन्दिर शान्ति भंग करते हैं । ‘मस्जिद’ प्रेम और सौहार्द्र बढाते हैं । आप अवश्य हीं व्यंग कर रहे हैं ।” एक ‘यूजर’ने न्यायालयसे यहतक पूछ दिया कि उन्हें यह क्यों लगता है कि मुसलमान न्यायालयके दूसरे निर्णयसे ‘दंगे-फसाद’पर उतर आएंगे ?
प्रस्तुत किए गए आवेदनमें कहा गया था कि कुतुबके भीतर २७ मन्दिर हुआ करते थे, जिनमें मुख्य रूपसे जैन तीर्थंकर ऋषभदेवके अतिरिक्त भगवान विष्णु प्रमुख रूपसे स्थापित हैं और इन्हीं मन्दिरोंको तोडकर ही ‘मस्जिद’का निर्माण किया गया । इन दोनोंके अतिरिक्त भगवान गणेश, शिव, मां पार्वती, और हनुमान सहित अन्य देवी-देवताओंके कुल २७ मन्दिर होनेकी बात कही गई थी ।
न्यायालयने शान्ति भंग होनेके नामपर, आवेदन निरस्तकर, अपनी असमर्थता दिखाई है । अब हिन्दुओंको न्याय हिन्दूराष्ट्रमें ही मिल सकता है; अतः सभी हिन्दू अपनी पूर्ण क्षमताके साथ संगठित होकर हिन्दूराष्ट्रके कार्यमें अपना योगदान करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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