गंगाकी रक्षाके लिए १११ दिनों तक अनशनपर बैठे स्वामी सानन्दका देहत्याग


अक्तूबर ११,२०१८

हरिद्वारमें गंगाकी रक्षाके लिए अनशनपर बैठे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्दकी गुरुवारको ऋषिकेशके एम्स अस्पतालमें मृत्यु हो गई है ! अनशनके १११वें दिवस बुधवारको प्रशासनने स्वामी सानन्दको अनशन स्थलसे उठाकर चिकित्सालयमें भर्ती करवाया था ।

सूचनाके अनुसार, धर्मनगरी हरिद्वारके मातृ सदनमें गत ११० दिवसोंसे स्वामी सानन्द गंगाकी रक्षाके लिए अनशनपर बैठे थे । स्वामीने बुधवार प्रातःसे जलका भी त्याग कर दिया था । इसके पश्चात एसडीएमके नेतृत्वमें प्रशासनने अनशनके १११वें दिवस बुधवारको स्वामी सानन्दको उठाकर ऋषिकेशके एम्स चिकित्सालयमें भर्ती करवाया गया था, जहांपर गुरुवारको हृदय गति रुकनेसे उनकी मृत्यु हो गई ।

स्वामी सानंदने गंगाकी रक्षाके लिए विधान बनाए जानेकी मांग की थी । स्वामीका कहना था कि वह गंगाकी रक्षाके लिए केन्द्रद्वारा कडे विधान (कानून) बनानेको लेकर प्रधानमन्त्री सहित मन्त्रियों और मुख्यमन्त्रियोंको कई बार पत्र लिख चुके हैं । कोई आश्वासन नहीं मिलनेसे निराश होकर उन्होंने अपने प्राणोंकी आहुति देनेके संकल्पके साथ अब जल भी त्यागनेका निर्णय किया । स्वामीने कहा था कि वह गंगामें बडे बांधोंके निर्माणका विरोध कर रहे हैं । गंगामें बनने वाली बांध परियोजनाओंको तत्काल रद्द किया जाना चाहिए । केन्द्र सरकारको गंगामें फैल रहे प्रदूषण और अवैध खननको रोकनेके लिए कडे कानून बनाने चाहिए ।

 

“नेहरूसे लेकर वर्तमान सत्ताधारियों तक, कांग्रेससे लेकर अन्य दलों तक, क्या कभी सन्तों और हिन्दुओंके हितैषी हुए हैं ? मर्यादा भंग कर चूकी इस पूतना रूपी राजनीतिका उद्देश्य केवल गो, गंगा व गीताको नष्ट करना है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : पंजाब केसरी



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