समलैंगिकतापर निर्णय हमारा बौद्धिक पतन


समलैंगिक प्रकरणको अपराध माना जाए या नहीं ?, इसपर न्यायालयसे निर्णय लेना, यही इस देशके बौद्धिक पतनको दर्शाता है । इसे तो एक अध्यादेश निकालकर, त्वरित घृणित अपराध घोषित करना चाहिए । जो कृत्य पशु भी नहीं करते, वह अमानवीय कृत्य मनुष्यकर निःसर्गके नियमको तोडे, वह तो निश्चित ही अपराध है, इसमें न्यायालय क्या निर्णय देगा ? हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे प्रकरण होंगे ही नहीं; क्योंकि तब मनुष्यके रूपमें आसुरी कृत्य करनेवाले समाजमें नहीं होंगे ! (२८.४.२०१८)



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