दीपावलीमें पूजन कैसे करें ?


दीपावलीपर मां लक्ष्मी व गणेशकी पूजाकी जाती है।  इस दिन लक्ष्मी पूजन में माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्रकी पूजाकी जाती है। गणेश पूजनके बिना कोई भी पूजन  अधूरा होता है इसलिए लक्ष्मीके साथ गणेश पूजन भी किया जाता है।

दीपावली पूजन कैसे करें ?

प्रातः स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

अब निम्न संकल्पसे दिनभर उपवास रखें –

मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-

सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं

गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं

इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।

संध्या के समय पुनः स्नान करें।

लक्ष्मीजीके स्वागत की तैयारीमें घरकी स्वच्छता कर गौ मूत्र छिडकें,  दीवारको चूने अथवा गेरूसे पोतकर लक्ष्मीजीका चित्र बनाएं। (लक्ष्मीजीका छायाचित्र भी लगाया जा सकता है।)

लक्ष्मीजीके चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बांधे ।

इसपर गणेशजीकी मिट्टीकी मूर्ति स्थापित करें।

फिर गणेशजीको तिलक कर पूजा करें।

अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें।

इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं।

फिर जल, मौली, चावल, फल, गुड, अबीर, गुलाल, धूप आदिसे विधिवत पूजन करें।

पूजा पहले पुरुष तथा उसके पश्चात स्त्रियां करें।

पूजा के बाद एक-एक दीपक घरके कोनोंमें जलाकर रखें।

श्री गणपति पूजन

सब देवताओंके पूजनमें सर्वप्रथम गणेशजीके पूजनका विशेष महत्व है क्योंकि गणेशजी पूजनके समय आनेवाले विघ्नोंको दूर कर पूजन विशिष्ट देवता तक पहुंचे इस हेतु सर्व अष्टद्वार खोलते हैं | हाथमें पुष्प व अक्षत लेकर श्री गणपतिका ध्यान और आवाहन करें | उनका पंचोपचार पूजन करें |

श्रीमन्गणाधिपतये नम: .
श्री गणेशाय नम: .

श्रीमान् महा गणपतिजीको नमस्कार है |

श्री गणेशजीके निमित्त अक्षत पुष्प छोडें | अर्थात् गणेशजीके सम्मुख अक्षत पुष्प रख दें |

अब एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्रसे लक्ष्मीजीका पूजन करें-

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया।

या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥

इस मंत्रसे इंद्र का ध्यान करें –

ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः।

शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥

इस मंत्रसे कुबेरका ध्यान करें-

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।

भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥

इस पूजनके पश्चात यदि तिजोरी हो तो उसमें भी गणेशजी तथा लक्ष्मीजीकी मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें।

लक्ष्मी पूजन रातके बारह बजे करनेका विशेष महत्व है। अर्धरात्रि अमावस्याके दिन शक्ति तत्त्व अधिक कार्यरत रहता है | पंचोचार पूजन उपर बताई गयी विधि अनुसार करें और खील , बताशे, लड्डू इत्यादि भोग लगाएं |

मंत्र-पुष्पांजलि :

( अपने हाथों में पुष्प लेकर निम्न मंत्रों को बोलें) :-

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्‌ ।

तेह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥

ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे ।

स मे कामान्‌ कामकामाय मह्यं कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु ॥

कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः ।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः, मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि ।

(हाथमें लिए फूल महालक्ष्मीपर चढ़ा दें।)

प्रदक्षिणा करें, साष्टांग प्रणाम करें, अब हाथ जोडकर निम्न क्षमा प्रार्थना बोलें :-

क्षमा प्रार्थना :

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्‌ ॥

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।

यत्पूजितं मया देवि परिपूर्ण तदस्तु मे ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव

त्वमेव सर्वम्‌ मम देवदेव ।

पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः ।

त्राहि माम्‌ परमेशानि सर्वपापहरा भव ॥

अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥

पूजन समर्पण :

हाथमें जल लेकर निम्न मंत्र बोलें :-

‘ॐ अनेन यथाशक्ति अर्चनेन श्री महालक्ष्मीः प्रसीदतुः’

(जल छोड दें, प्रणाम करें |)

विसर्जन :

अब हाथमें अक्षत लें (गणेश एवं महालक्ष्मीकी प्रतिमाको छोड़कर अन्य सभी) प्रतिष्ठित देवताओंको अक्षत छोडते हुए निम्न मंत्रसे विसर्जन कर्म करें |

यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्‌ ।

इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च ॥

ॐ आनंद ! ॐ आनंद !! ॐ आनंद !!!

.

(आरती करके शीतलीकरण हेतु जल छोड़ें एवं स्वयं आरती लें, पूजामें सम्मिलित सभी लोगोंको आरती दें फिर हाथ धो लें।)

फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें ।

घारके वयोवृद्धोंके चरणोंकी वंदना करें।

व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दीकी भी विधिपूर्वक पूजा करें।

रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल्ल, लोढा तथा छाज (सूप) पर कंकूसे तिलक  करें। (हालांकि आजकल घरोंमे ये सभी वस्तुयेँ उपलब्ध नहीं है किन्तु भारतके गांवोंमें और छोटे कस्बोंमें आज भी इन सभी वस्तुओंका विशेष महत्व है क्योंकि जीवन और भोजन का आधार ये ही हैं)  |

दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाजमें कूडा रखकर उसे दूर फेंकनेके लिए ले जाते समय कहें ‘लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ’।

लक्ष्मी पूजन के बाद अपने घरके तुलसीके गमले में, पौधोंके गमलोंमें घरके आसपास, वृक्षके पास दीपक रखें और  अपने पडोसियोंके घर भी दीपक रखकर आएं।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution