नूतन सात्त्विक भारतीय परम्परा अनुसार परिधान धारण करें, इससे भी देवताका तत्त्व आकृष्ट होता है । काले वस्त्र कमसे कम शुभदिनमें न पहनें । व्रत-त्योहारके दिवस विशिष्ट देवी या देवताका तत्त्व कार्यरत रहता है; अतः यदि हम सात्त्विक रीतिसे आचरण करते हैं तो उसे हम अधिकसे अधिक प्रमाणमें ग्रहण कर सकते हैं । आज कल लोग नगरों एवं महानगरोंमें पारम्परिक वस्त्र बहुत कम प्रमाणमें पहनते हैं और व्रत-त्योहारमें भी जो प्रचलनमें (फैशनमें) रहता है उसे पहनते हैं, इस कारण वस्त्रसे होनेवाले लाभसे वे वंचित रह जाते हैं । जैसे स्त्रियां सिंथेटिककी साडियां या सलवार/लाचा व कुर्ती पहनती हैं, तो पुरुष पठानी कुर्ता पहनते हैं तो कुछ कोट-पतलून पहनते हैं, कुछ शर्ट, टी शर्ट जीन्स पहनते हैं; इन सबमें देवताके तत्त्व आकृष्ट करनेकी रत्ती भर भी क्षमता नहीं होती है, अपितु हमारे चारों ओर सूक्ष्मसे एक काला आवरण निर्माण हो जाता है जिससे देवताका तत्त्व हमारे मन एवं शरीरमें प्रवेश नहीं कर पाता है; यह सामान्य दिवसोंमें भी होता है; अतः पारम्परिक पद्धतिके सूती या रेशमी वस्त्र धारण करना चाहिए । – पू. तनुजा ठाकुर (१३.१०.२०१७)
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