‘तालिबानसे सीखना होगा, देहलीकी सडकोंपर उतरना होगा’, ‘बुर्के’पर मुसलमानोंको भडकानेकी योजना, ‘सीएए’ विरोधी ‘दंगाई गैंग’का ‘ऑडियो’ सार्वजनिक
१० फरवरी, २०२२
देहली ‘दंगों’के आरोपित आसिफ इकबाल तन्हाका एक ध्वनि सन्देश सार्वजनिक हो रहा है, जिसमें वह कर्नाटकमें आरम्भ हुए ‘हिजाब’ विवादको लेकर ‘भडकाऊ’ वक्तव्य देता सुनाई दे रहा है । यह वार्ता मुसलमान संगठनोंके साथ हो रही थी । सार्वजनिक ‘ऑडियो’ ‘ट्विटर स्पेस’की एक ‘रिकॉर्डिंग’का बताया जा रहा है । इस ‘ऑडियो’को ‘वीडियो फॉर्मेट’में ‘@TheAngryLord’ नामके ‘ट्विटर हैंडल’से साझा किया गया है ।
इस ‘स्पेस’का शीर्षक ‘कर्नाटक हिजाब रो, क्या हाईकोर्ट न्याय देगा?’ था । इसे ‘जमात-ए-इस्लामी’ हिन्दकी छात्र शाखा ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (SIO)’द्वारा ’होस्ट’ किया गया था ।इसमें ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI)’ और उसकी ‘स्टूडेंट विंग कैम्पस फ्रंट ऑफ़ इंडिया (CFI)’के सदस्य उपस्थित थे ।
इसमें वक्ताके रूपमें तन्हा कह रहा था, “हम इसे (हिजाब विवादको) केवल कर्नाटकका विवाद न बना करके, इसका समूचे भारतमें प्रसार करना है । देहलीको ‘सेंटर ऑफ एजिटेशन’ बनाना है । आज सवेरे जबसे वह दृश्यपट (कर्नाटकमें ‘पुलिस’ कार्यवाहीका) सार्वजनिक हुआ है, तबसे अत्यधिक व्यथित कर रहा है । उस वक्तसे मैं कई मुसलमान संस्थाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओंसे निरन्तर वार्ता कर रहा हूं कि अन्ततः हम लोग देहलीमें क्या कर सकते हैं ? इस विवादको लेकर ! मुझे सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं कि इसपर हमें भी कुछ करना चाहिए और शीघ्र ही हम लोग उनके समर्थनमें सडकोंपर उतरेंगे ।”
आसिफने आगे कहा, “आज पूरे दिन ‘ट्विटर’पर‘अल्लाह-हु-अकबर’ प्रचलित हुआ है; किन्तु आप अभी भी कहीं चले जाएं, मैं स्वयं ओखलामें रह रहा हूं, तो अधिकतम लोग मिले हैं, अधिकतम छात्र ऐसे मिले हैं, जिन्हें दृश्यपट सार्वजनिक होनेसे पूर्व पता ही नहीं है कि कर्नाटकमें क्या हो रहा है ? यहांकी मुसलमान जनसंख्याको पता ही नहीं है कि कर्नाटकमें ‘हिजाब’का क्या विवाद है । हमें इस विवादको न्यूनतम घरोंतक ले जानेकी आवश्यकता है ।”
१५ अगस्त २०२१ को ‘होस्ट’ किए गए एक अन्य ‘स्पेस’में तन्हाको तालिबानका समर्थन करते सुना जा सकता है । उसने कहा, “अल्हम्दुलिल्लाह ! हमें तालिबानसे सीखना चाहिए कि स्वतन्त्रता प्राप्त करनेके लिए किस प्रकारकासंघर्ष और प्रयास करना चाहिए ।”
शाहीन बागका रहनेवाला आसिफ इकबाल तन्हा देहली स्थित ‘जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI)’का छात्र है । वह वर्ष २०१४ से ‘एसआईओ’से जुडा हुआ है । उसे मई २०२० में ‘यूएपीए’के अन्तर्गत बन्दी बनाया गया था । उत्तर पूर्वी देहली ‘दंगों’में ‘पुलिस’को उसकी बडी भूमिकाका पता चलाथा । आसिफने देहली ‘दंगों’में अपनी भूमिकाको स्वीकारा था । उसने १२ दिसम्बर २०१९ को जामियाके द्वार क्रमाङ्क ७ से लगभग ३००० लोगोंका एक ‘मार्च’ भी निकाला था । वह कारागृहमें बन्द शरजील इमामका सहयोगी भी बताया जारहा है ।
उपर्युक्त प्रकरणसे स्पष्ट होता है कि मुसलमान पन्थको दिग्भ्रमित करके बडे स्तरपर प्रदर्शनकी सिद्धता है । ऐसेमें केन्द्र शासनको त्वरित कार्यवाही करते हुए, इस व्यक्तिको (आसिफ इकबाल तन्हाको) कारागृहमें डालना चाहिए, अन्यथा ऐसा न हो कि देहलीको तालिबान बनानेका षड्यन्त्र सफल हो जाए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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