वसीम रिजवीकी ‘मुहम्मद’पर प्रतिबन्ध नहीं, देहली उच्च न्यायालयने प्रकरण सुननेको किया अस्वीकार, सभी प्रतियां नष्ट करने का था अनुरोध
३१ दिसम्बर, २०२१
कुछ दिनों पूर्व ही ‘इस्लाम’ पन्थको त्यागकर हिन्दू धर्म अपनानेवाले जितेन्द्र त्यागीकी (पूर्व नाम वसीम रिजवीकी) पुस्तक ‘मुहम्मद’पर प्रतिबन्ध लगानेका अनुरोध करनेवाले प्रार्थनापत्रको देहली उच्च न्यायालयने अस्वीकृत कर दिया है । प्रार्थनापत्रमें कहा गया था कि पुस्तकमें ‘इस्लाम’, ‘कुरान’ और ‘पैगंबर मुहम्मद’के विरुद्ध विवेचना की गई है । कमर हसनैनद्वारा प्रविष्ट प्रार्थनापत्रमें ‘रिजवी’को भविष्यमें इस प्रकारके कृत्य करनेसे रोकने के लिए २,०५,००,००० रुपएकी क्षतिपूर्ति देनेका अनुरोध किया गया था । हसनैनने कहा था, “पुस्तककी सभी प्रतियोंको नष्ट कर दिया जाए । यह पुस्तक न केवल ‘इस्लाम’ माननेवालों के लिए अपमानजनक है; अपितु किसी अन्य पाठकके लिए भी आक्रामक, घृणित और विचलित करनेवाली है ।”
इसपर न्यायालयने कहा, “प्रकरणको बनाए रखनेके लिए, प्रार्थनाकर्ताको व्यक्तिगत वैधानिक अधिकार अथवा वैधानिक क्षति होनी चाहिए, जो कि वर्तमान प्रकरणमें नहीं है ।”
जितेन्द्र त्यागीने अपनी पुस्तक ‘मुहम्मद’के माध्यमसे ‘इस्लाम’का वास्तविक स्वरूप सभीके समक्ष प्रकट किया है । यह बात जिहादियोंके गले नहीं उतर रही । न्यायालयने यह अस्वीकरण संविधानके आधारपर किया है और यह वही संविधान है, जिसकेद्वारा प्रदत्त अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रताके आधार लपर जिहादी समुदाय हिन्दू देवी-देवताओंको अपशब्द कहता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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