पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम् ।
सुरासुराराधितपादपद्मं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि ॥
अर्थ : जो भगवान शंकर पूर्वोत्तर दिशामें चिताभूमि वैद्यनाथ धाममें सदा ही पार्वती सहित विराजमान हैं और देवता व दानव जिनके चरणकमलोंकी आराधना करते हैं, उन्हीं ‘श्रीवैद्यनाथ’ नामसे विख्यात शिवको मैं प्रणाम करता हूं ।
—————
Leave a Reply