देव स्तुति


सरसिजनयने सरोज हस्ते धवळतरां शुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीदमह्यम् ।।
अर्थ : हे सुंदर नयनोंवाली महालक्ष्मी आपके वर्ण आपके हस्तके कमलोंसे भी श्वेत हैं और आप सुगंधित पुष्पमालासे सुशोभित है !
हे भगवती , हरिप्रिया, आप ही मेरे मनोभावको जानती हैं और आप ही त्रिलोककी जननी और हमारी सुख-समृद्धि आपपर निर्भर करता है ! आप प्रसन्न हों और हमपर अपनी कृपा करें !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution