जुलाई ८, १०२८
झारखण्डके दुमका प्रान्तके फूलपहाडी गांवमें बलपूर्वक धर्मान्तरण करानेके प्रयासमें १६ लोगोंको बन्दी बनाया गया है । ये सभी दोषी कारावासमे बन्द हैं । इन लोगोंमें सात महिलाएं भी सम्मिलित हैं ।
परिवाद देने वाले रमेश मुर्मूका आक्षेप है कि सभी दोषीगांवमें घुसकर पहले तो संथाल आदिवासियोंको बलपूर्वक ईसाई धर्म स्वीकृत करवाया, फिर आदिवासियोंके पूजा स्थल जाहेरथान जानेसे रोक रहे थे ।
सभी दोषियोंके विरुद्ध शिकारीपाडा थाना ‘काण्ड संख्या ५२/१८’, ‘धारा २९५(A)/३४’ और ‘झारखण्ड धर्म स्वतन्त्र अधिनियम’की ‘धारा ४’ के अन्तर्गत प्राथमिकी अंकितकर कारावास भेज दिया गया । ग्रामीणोंने रातभर दोषियोंको गांवमें ही पकडकर रखा और दूसरे दिवस पुलिसको सूचना दी । पुलिसने सभी दोषियोंको कारावास भेज दिया गया ।
ये सभी धर्मान्तरणके लिए ध्वनि-विस्तारक यन्त्रपर (माइक) धर्मका प्रचारकर धर्मान्तरणके लिए लोगोंपर दबाब रहे थे । सभी धर्म प्रचारक मिनी वाहनसे गांव पहुंचे और ध्वनि-विस्तारक यन्त्र लगाकर ईसाई धर्मका प्रचारकर रहे थे । वहांके लोगोंके अनुसार उस गांवमें कोई भी ईसाई नहीं है और जब गांव वालोंने ऐसा करनेसे मना किया तो भी वो नहीं रुके । इसके बाद गांव वालोंने उन्हें बन्धक बना लिया और पुलिसको सौंप दिया ।
स्रोत : जी न्यूज
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