नक्सलियों और आतंकवादियोंसे इस देशको सुरक्षा देनवाले राजनीतिक पक्षको ही इस देशकी जनताने अब अपना प्रतिनिधि बनाना चाहिए । विकासकी अपेक्षा देशकी आन्तरिक सुरक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है, यह, राजनेताओं एवं जनता दोनोंको समझमें आना चाहिए और जो भी पक्ष खुलकर, ऐसे अराजक तत्त्वोंका समूल नाश करे, इसकी घोषणाकर उस दिशामें कार्य करे, उसे ही चुनावमें अपना मत देना चाहिए ! हमारे देशके राजनेता सैनिकोंके प्राणोंके प्रति संवेदनशील हों, इस हेतु प्रत्येक राजनेताके एक पुत्र, पुत्री या निकट सम्बन्धीका सेनामें होना अनिवार्य होना चाहिए, तभी इन्हें ज्ञात होगा कि हमारी अदूरदर्शी नीतियोंके कारण जब अपनोंकी असामयिक मृत्यु होती है या कश्मीर जैसे विषम परिस्थितिमें प्राणोंको हथेलीपर रखकर जीवित रहते हैं, तो कैसा लगता है ?!
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