२०१६ में हमारी संस्थाद्वारा वार्षिक वस्त्र दानका कार्यक्रम झारखण्डके गोड्डा जनपदमें था । संस्थाद्वारा २५ ग्रामके विधवाओंको साडी वितरित करनेका नियोजन किया गया था । जब हमारे साधक श्वेत साडीका बडी संख्यामें क्रय करने हेतु थोक विक्रेताओंके पास गए तो उनके पास श्वेत साडी अधिक संख्यामें नहीं मिल पाई, जो हमारे लिए आश्चर्यका विषय था । मुझे लगता था कि ग्रामीण भागमें सामान्यत: विधवा और वृद्ध स्त्रियां श्वेत वस्त्र पहनती हैं; अतः उन्हें वैसा ही वस्त्र देना चाहिए । वस्त्र वितरणके समय निर्धन वृद्ध स्त्रियां श्वेत साडी नहीं लेना चाहती थीं, सभी रंगीन साडी मांग रही थीं । हम सब तो इस संकोचमें थे कि हमारे पास अधिक श्वेत साडीकी व्यवस्था नहीं हो पाई है, ऐसेमें हमें उन्हें रंगीन वस्त्र देने होंगे और क्या वे इसे स्वीकार करेंगी ?; किन्तु सभी विधवा रंगीन साडी मांग रही थी तो मुझे जिज्ञासा हुई और जब हमारे पास श्वेत साडी जो अधिक संख्यामें नहीं थी, उसे भी लेनेसे प्राय: सभी अस्वीकार कर रही थी तो मैंने पूछा कि आपलोग कोई श्वेत वस्त्र क्यों नहीं लेना चाहती हैं ?, तो जो उन्होंने कहा, वह मैं आजतक भूल नहीं पाती हूं ! दो-तीन स्त्रियोंने एक साथ कहा, “श्वेत साडी तो आप दे देंगी; किन्तु उसे प्रतिदिन धोनेके लिए साबुनके पैसे हम कहांसे लाएंगे ?” मैं सुनकर आश्चार्यचकित हो गई और शीघ्र अति शीघ्र हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना होनी ही चाहिए, यह संकल्प और भी दृढ हुआ ! मैंने ईश्वरको कृतज्ञता व्यक्त की कि उन्होंने हमें अपने देशके विधवाओंकी यह स्थितिसे अवगत करवाया, वे हमें शक्ति दें कि हम रामराज्य रूपी हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु और उत्कण्ठासे प्रयास कर सकें !
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