वर्तमान रुग्ण राष्ट्र और धर्मकी स्थितिके उद्धार हेतु अनेक राष्ट्र एवं धर्मप्रेमी रुपी चिकित्सकोंकी है आवश्यकता !
अब एक-एक रोगीके लिए नहीं अपितु मरणोन्मुख स्थितिवाले राष्ट्र तथा धर्म हेतु सहस्रों राष्ट्रप्रेमी तथा धर्मप्रेमी रुपी चिकित्सकोंकी आवश्यकता हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले
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