धर्माचरण उसे कहते हैं जिससे मन, बुद्धि और शरीर को अल्प सा कष्ट हो परन्तु उससे देवत्व निर्माण हो, भारतीय संस्कृति अंतर्गत प्रतिदिन का धर्मचारण साधना का अभिन्न भाग हुआ करता था अतः उसका पालन करना थोडा कठिन होता था पाश्चात्य संस्कृति अनुसार जीने की शैली में सुविधा है परन्तु साधना नहीं होती, उसके कुछ उदहारण देखते हैं:
* साड़ी और धोती पहनना कठिन है परन्तु जींस और शर्ट पहनना कठिन नहीं अतः भारतीय संस्कति के वस्त्र देवत्व निर्माण करने की क्षमता रखते हैं और साधना के लिए पोषक सिद्ध होते हैं |
* ब्रह्म मुहूर्त में उठना कठिन होता है और सूर्योदय के पश्चात अपने मन अनुसार जब दिन चढ़ आये तब उठना सरल होता है अतः सूर्योदय से पहले उठना अध्यात्मिक दृष्टि से पोषक होता है | – तनुजा ठाकुर
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