पिताकी मृत्युके पश्चात १० सहस्र लोगोंकी ‘घर वापसी’ करानेवाला बेटा, चरण पखार आदिवासियोंको मूल धर्ममें ला रहे
२२ नवम्बर, २०२१
छत्तीसगढके जशपुरमें पत्थलगांव है, यहींके खूंटापानी नामके गांवमें कुछ समय पूर्व ‘वैदिक ज्ञान गंंगा विश्व कल्याण महायज्ञ’ सम्पन्न हुआ है । इसी यज्ञसे कुछ चित्र सामने आए, जिनमें एक युवक लोगोंके चरण पखार उनकी हिन्दू धर्ममें ‘वापसी’ करवा रहा था । इस यज्ञके माध्यमसे ४०० परिवारके लगभग १२०० ऐसे लोगोंने घर’वापसी’ की, जो ईसाई बन गए थे ।
पूर्व मुख्यमन्त्री वाजपेयी जीके शासनमें, मन्त्री रहे जूदेव, इसी प्रकार चरण पखारकर उन आदिवासियोंकी मूल धर्ममें ‘वापसी’ करवाते थे, जो ईसाई ‘मिशनरियों’के झांसेमें आकर धर्म परिवर्तन कर लेते थे । अगस्त २०१३ में उनके निधनके उपरान्त इस शृंखलाको उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढा रहे हैं । प्रबल छत्तीसगढ ‘भाजपा’के प्रदेश मन्त्री भी हैं ।
राजपरिवारसे जुडे होनेपर भी प्रबल जूदेव अपने पिताकी भांति ही निरन्तर आदिवासी क्षेत्रोंमें सक्रिय रहते हैं । वे छत्तीसगढ, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्योंमें १० सहस्रसे अधिक लोगोंकी, इस प्रकारके कार्यक्रमोंके माध्यमसे, घर वापसी करवा चुके हैं ।
ईसाई ‘मिशनरियों’के कार्य-कलाप करनेकी शैलीका उल्लेख करते हुए प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बताते हैं कि सुनियोजित प्रकारसे ‘मिशनरियों’का समूह आदिवासी क्षेत्रोंमें सक्रिय हैं । वे निर्धन परिवारोंपर दृष्टि रखते हैं । यह जाननेका प्रयास करते हैं, किसको क्या समस्या है ? उसके पश्चात, समाधानके नामपर ‘भोले-भाले’ लोगोंका धर्म परिवर्तन करवा देते हैं । कभी ऐसा शिक्षाके नामपर होता है, तो कभी उपचारके नामपर और कभी किसी और नामपर । उन्होंने बताया कि ‘मिशनरी’ अब इन आदिवासियोंकी पैतृक सम्पत्तिका अतिक्रमण कर रहे हैं । बकौल जूदेव उनके निकट ऐसे कई परिवाद (शिकायत) आए हैं, जिसमें कोरवा लोगोंकी भूमितक का अतिक्रमण कर लिया गया है ।
आजकी वर्तमान परिस्थितिको देखते हुए, प्रबल जूदेव जैसे राष्ट्रवादी लोगोंकी अति आवश्यकता है । उनके इस अभियानका समर्थन किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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