मलयाली चलचित्र निर्देशक अली अकबरने मुसलमान ‘मजहब’ त्यागनेका लिया निर्णय, ‘सीडीएस’ रावतके बलिदानपर कट्टरपन्थियोंके व्यवहारसे हुए व्यथित
१० दिसम्बर, २०२१
‘सीडीएस’ जनरल बिपिन रावत सहित १३ देशरक्षकोंकी वीरगतिपर, कट्टरपन्थी उनपर अट्टहास कर रहे हैं । इससे निराश होकर, केरलके मलयाली चलचित्रोंके निर्देशक अली अकबरने मुसलमान ‘मजहब’को त्यागने और हिन्दू धर्ममें लौटनेकी घोषणा की है । ‘फेसबुक लाइव’पर निर्देशकने कहा कि वे ‘इस्लाम’का परित्याग कर रहे हैं ।
अली अकबरने कहा कि सेना प्रमुख ‘सीडीएस’ बिपिन रावतकी वीरगतिके पश्चात कई लोग ‘फेसबुक’पर समारोह मना रहे थे, जिसके विरोधमें वे इस्लामको ही त्याग रहे हैं । ‘सीडीएस’ बिपिन रावतकी मृत्युके पश्चात अकबरने ‘फेसबुक’पर प्रत्यक्ष दृश्यपट (लाइव वीडियो) प्रसारित किया था; किन्तु ‘फेसबुक’ने उसे जातिवादी बताकर, निर्देशकके खातेको एक माहके लिए बन्द कर दिया । अकबरने पुनः दूसरा ‘फेसबुक’ खाता बनाया और उसके माध्यमसे प्रस्तुत होकर इस्लाम त्यागनेकी घोषणा कर दी और कहा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है; इसलिए मैं अपना धर्म छोड रहा हूं । न मेरा और न ही मेरे परिवारका कोई और धर्म है, मैं उन वस्त्रोंका एक टुकडा फेंक रहा हूं, जिनके साथ मैं उत्पन्न हुआ था ।” ‘ट्विटर’ उपभोक्ता प्रतीश विश्वनाथने कहा कि मलयालमके प्रसिद्ध चलचित्र निर्देशक अली अकबर हिन्दू धर्म अपना रहे हैं और अपना नाम परिवर्तितकर रामसिम्हन रख रहे हैं । इस्लामकी वर्तमान पीढीको देखकर बहुत अच्छा लगा, जिनके पूर्वजोंको बलपूर्वक परिवर्तित किया गया था, वे लौटकर अपनी जडोंकी ओर आ रहे हैं ।
देशद्रोही कट्टरपन्थी इसका विस्मरण कर बैठे हैं कि इन्हीं देशरक्षकोंके कारण ही वे जीवित हैं; वरन् चीनके रोहिंग्याकी भांति, इनकी जाति भी नष्ट हो रही होती । ऐसे देशद्रोही केवल कठोर दण्डके पात्र हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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