वर्तमान समयमें कुछ व्यक्ति एवं कुछ संस्थाएं अहिंसक पद्धतिसे राष्ट्रद्रोहियों एवं धर्मद्रोहियोंके कुछ अनैतिक सिद्धान्त या उनके समाजद्रोही, राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्रोही कृत्योंका विरोध करने हेतु आमरण ‘अनशन’ करती हैं । अहिंसक पद्धतिसे अपने विचारको व्यक्त कर, विरोध करना यह सभ्य समाजका लक्षण है; परन्तु जब असभ्योंसे अपनी बात मनवानी हो तो साम, दाम, दण्ड, भेद, इसमेंसे जो भी नीति आवश्यक हो, उसे अपनानेमें कोई पाप नहीं । सुसंस्कृत भाषामें कहें तो ‘शठे शाठ्यं समाचरेत्’ और देसी भाषामें तो आपने तो सुना ही होगा ‘जैसे देवता वैसी पूजा’; अतः ऐसे व्यक्तियोंके सामने अपने अनमोल मानव जीवनकी आहुति न दें ! कुटिलोंके साथ कुटिलता पाप नहीं कहलाती और दुष्टोंका संहार, हिंसा नहीं कहलाती; अतः विरोधके मापदण्ड परिवर्तित करें ! अन्यथा वही बात हो जाएगी ‘भैंसके सामने बीन बजाए और भैंस बैठे पघुराए ।’
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