दुर्गा पूजा ‘जुलूस’में लोगोंको कुचलनेवाला ‘कार’ चालक (ड्राइवर) मोहम्मद उमर बन्दी, नदीम ‘फरार’
१७ अक्टूबर, २०२१
मध्य प्रदेशकी राजधानी भोपालमें शनिवारको (१७ अक्टूबर २०२१) रात्रि दुर्गा पूजा प्रतिमा विसर्जनके ‘जुलूस’में सम्मिलित श्रद्धालुओंको एक ‘कार’ कुचलती हुई निकल गई । ‘कार’के चालकका नाम मोहम्मद उमर है, जो भानपुर मल्टी छोलाका रहनेवाला है । उसके साथ अशोक गार्डनका नदीम बैठा हुआ था । जहां २३ वर्षीय मोहम्मद उमरको बन्दी बना लिया गया है, २२ वर्षीय नदीमको खोजा जा रहा है ।
पूछताछमें मोहम्मद उमरने बताया है कि उसे लगा कि ‘कार’ जनसमूहमेंसे निकल जाएगी; किन्तु एक बच्चेके ऊपर ‘कार’का पहिया चढ जानेके कारण, वह चिल्लाने लगा और जनसमूह आक्रोशित हो गया । चालकका कहना है कि ‘कार’को घेरकर कुछ युवक वाद-विवाद करने लगे और ‘कार’का कांच फोडने लगे, जिसके पश्चात, भागनेके लिए उसने ‘कार’को ‘रिवर्स’ किया; क्योंकि आगे स्थान नहीं था । मोहम्मद उमरका कहना है कि इसी कारणसे लोग घायल हुए ।
यद्यपि वहां उपस्थित श्रद्धालुओंका कहना है कि ‘कार’ चालकने कई बार ‘कार’को आगे-पीछे करके लोगोंको चोटिल किया । घायल रोशन शाक्यका कहना है कि उन्हें ‘कार’से १० मीटरतक घसीटा गया । शोर मचानेके पश्चात भी ‘कार’ चालकने ‘कार’ नहीं रोकी और २०० मीटर ‘रिवर्स’ कर भागा । लोगोंका कहना है कि वह ‘नशे’में भी था । रोशनके मस्तकसे अधिक रक्त बह रहा था और वे मूर्छित हो गए थे । घायल सुरेंद्र सेनने बताया कि उसने उनके पांवपर वाहन चढाकर गति बढा दी । लोगोंने उसे आगे जानेसे रोका; परन्तु उसके पश्चात भी ‘कार’ चालकने बात नहीं मानी ।
क्या यह मुहर्रमका ‘जूलुस’ होता, तब भी जिहादी ऐसा ही करते ! नहीं करते । पूर्ण आशंका है कि किसी विद्वेषके कारण यह कृत्य किया गया हो, इसकी गहन जांच होनी चाहिए और हिन्दुओंको जिहादका पूर्णतः प्रतिकार करनेके लिए सङ्गठित और सतर्क रहनेकी आवश्यकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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