‘मदरसों’की उपस्थिति ही समाप्त हो जाना चाहिए : असम मुख्यमन्त्रीने मुसलमानोंकी अच्छी शिक्षाका श्रेय हिन्दू इतिहासको दिया
२३ मई, २०२२
भारतको ‘यूनियन ऑफ स्टेट’ कहनेपर असमके मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वा सरमाने राहुल गांधीको ‘आडे हाथों’ लिया है । उन्होंने राहुल गांधीको ‘जेएनयू’वालोंसे अनुशिक्षण (ट्यूशन) पढनेवाला बताया है । मुख्यमन्त्री हिमंताने ‘मदरसा’ शब्द ही समाप्त करनेकी प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि ‘मदरसे’में बच्चोंको प्रवेश दिलवाना ही ‘मानवाधिकारी’का उल्लङ्घन है । यह बातें उन्होंने पाञ्चजन्यके देहली स्थित एक संगोष्ठीमें (सेमिनारमें) शनिवारको (२१ मई २०२२ को) कही हैं ।
‘सीएम’ सरमाने ‘मदरसों’को मानवताका ‘दुश्मन’ बताते हुए कहा, “ये ‘मदरसा’ शब्द ही विलुप्त हो जाना चाहिए । जबतक ‘मदरसा’ मस्तिष्कमें घूमेगा, तबतक बच्चा कभी ‘डॉक्टर’ या ‘इंजीनियर’ नहीं बन पाएगा । यदि ये बातें बच्चोंको सिखाई जाएं तो बच्चे स्वयं ही ‘मदरसे’में न जाएं । ‘मदरसे’में बच्चोंका प्रवेश ही मानवाधिकारके उललङ्घनके लिए करवाया जाता है । आप अच्छेसे ‘कुरान’ पढाइए; किन्तु सबसे अधिक गणित और विज्ञान पढाएं ! बच्चोंको आप घरमें ‘मजहबी’ बातें पढाएं !”
मुख्यमन्त्री हिमंताने आगे कहा, “विद्यालयोंमें वही पढाया जाना चाहिए, जो छात्रोंको ‘डॉक्टर’, वैज्ञानिक और ‘प्रोफेसर’ बनाए । आज जो मुसलमान ‘कुरान’को ‘रट’ चुके हैं, ये सबके सब कभी हिन्दू थे । यदि किसी मुसलमान बच्चेकी पढाईमें बहुत अच्छी ‘मेरिट’ है तो उसका श्रेय भी मैं उसके हिन्दू इतिहासको दूंगा ।”
मुख्यमन्त्री हिमंता बिस्वाने उचित ही कहा है । ‘मदरसे’में पढा एक भी बच्चा कभी चिकित्सक , अभियन्ता व वैज्ञानिक नहीं बना होगा । जबतक ‘मदरसे’ समाप्त नहीं होंगे, तबतक मुसलमानोंके बच्चोंका समाजकी मुख्य धारामें आना सम्भव नहीं है; इसलिए ‘मदरसे’को विद्यालयोंमें परिवर्तित करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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