जनवरी ११, २०१९
राम मंदिरको लेकर ‘एएमयू’ छात्र संघके पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसनने विवादित वक्तव्य दिया है । फैजुलने कहा है कि यदि मस्जिद बनानेके लिए निर्णय आया तो ‘वो’ समूचे देशमें प्रत्येक स्थानपर रक्तकी नदियां बहानेसे नहीं चूकेंगें ! अल्लाहसे प्रार्थना करता हूं कि इस देशकी रक्षा होती रहे । यद्यपि उन्होंने ‘वो’ शब्दका प्रयोग किसके लिए किया ?, यह बात उन्होंने अपने वक्त्वयमें स्पष्ट नहीं की है ।
छात्र नेताने आगे कहा है कि बाबरी मस्जिद केवल एक आस्था ही नहीं, बल्कि मुसलमानोंके अस्तित्वका प्रकरण है । कलको यदि न्यायालयकका निर्णय मस्जिदके विरुद्ध आया, तो मुसलमान अपने देशकी किसी भी वस्तुको हानि नहीं पहुंचाएगा । यदि मुसलमान बाबरी मस्जिदसे अपना अधिकार हटा लें तो फिर इसका उत्तरदायित्व कौन लेगा कि बनारसकी ज्ञानवापी मस्जिद, जामा मस्जिदकी अस्मितापर कोई दावेदारी नहीं करेगा ?
उन्होंने आगे कहा कि साक्षी महाराज जैसे सांसद संवैधानिक पदपर रहते हुए भी नारा देते हैं कि काशी, मथुरा, अयोध्या छोडो, जामा मस्जिद तोडो ! यह देशहितमें उचित नहीं है !
“‘एएमयू’ सदृश आतंक पोषित विश्वविद्यालयसे स्नातक फैजल हुसनको सम्भवतः इतिहासका ज्ञान नहीं ! इतिहाससे लेकर अबतक धर्मान्ध फैजल कोई एक ऐसा प्रकरण बताएं जिसमें हिन्दुओंने किसी प्रकरणपर बिना ही बात किसीको रक्तरंजित किया हो ? वस्तुतः अवैध रूपसे अधिकार, बलप्रयोग, परस्त्रीपर कुदृष्टि, नगरके नगर नष्ट करना, लूटना यह सब इस्लामिक डीएनएमें ही है । हिन्दुओंका इतिहास तो शूरवीरता, सत्यता व दयासे परिपूर्ण है, सम्भवतः तभी आप जैसे लोग एक हिन्दू राष्ट्रमें रहकर हिन्दू विरोधी वक्तव्य देनेके पश्चात भी निडर हैं ! और यदि इतना ही भय है तो क्यों न आप सब एकत्र होकर राम मन्दिरके पक्षमें आए; क्योंकि यह तो सर्वविदित सत्य है कि वह केवल राम मन्दिरकीभूमि ही है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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