आठ राज्योंमें किसान सडकोंपर उतरे, सडकोंपर दूध बहाया, टमाटर फेंकें !


देशके कई राज्योंमें किसानोंने उपजके उचित मूल्य, ऋण मुक्ति एवं अन्य मांगोंको लेकर १० दिवसीय ‘गांव बन्द आन्दोलन’ शुक्रवारसे आरम्भ कर दिया। पहले दिन कई स्थानोंपर किसानोंने सडकपर दूध बहाया और टमाटर फेंक दिये। आन्दोलनका प्रभाव उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा और पंजाबमें देखनेको मिला।

राष्ट्रीय किसान महासंघके संयोजक शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ने कहा, मध्यप्रदेश सहित देशके २२ राज्योंमें देशव्यापी ‘गांव बन्द आन्दोलन’ आरम्भ हो गया है । इस आन्दोलनके अन्तिम दिन १० जूनको ‘भारत बंद’का आह्वान पूरे देशके किसान संगठनोंद्वारा किया जाएगा। इसमें नगरके व्यापारियों, समस्त प्रतिष्ठानोंसे निवेदन किया जाएगा कि वे दोपहर २ बजे तक अपने-अपने प्रतिष्ठान बन्द रखकर सहयोग करें !

उत्तरप्रदेशके कई नगरोंमें किसान सडकपर उतर आए। अमरोहामें किसानोंने सडकपर टमाटर फेंकें ।
वहीं सम्भलमें किसानोंने दूध बहाया और टमाटर फेंकें ।  मुरादाबादमें ‘भारतीय किसान संघ’ने बिलारीके खनुपुरामें दूध और सब्जियोंकी आपूर्ति बाधित की।

मध्य प्रदेश: मंडीमें सब्जियोंके मूल्य गिरे
किसान आन्दोलनके प्रथम दिन इन्दौ में फल-सब्जियोंकी आवक अल्प हो गई; लेकिन सब्जियोंके पर्याप्त खरीदारोंके थोक मंडी नहीं पहुंचनेपर इनके मूल्य आधे रह गए। मंदसौरके किसानोंने किसी भी अवस्थामें सब्जी और दूधको नगरसे बाहर भेजनेसे मना कर दिया।  छह जूनको मंदसौरमें राहुल गांधी रैलीको सम्बोधित करेंगे। झाबुआमें धारा १४४ लगा दी गई है। साथ ही प्रशासनने किसानोंसे शांति बनाए रखने की विनती की है।

फरीदकोटमें किसानोंने सब्जी, फल और दूधकी आपूर्ति रोक दी है। किसानोंने सब्जियोंके वाहनोंको रोक दिया।  लुधियानाके समरालामें किसानोंने दूधसे भरा बडा पात्र उलट दिया। माछीवाडामें किसानोंने दूधकी आपूर्ति नहीं होने दी और जो भी दूध लेकर जा रहा था उसकी गाडीको रोक कर दूध सडकोंपर बहा दिया। ‘भारतीय किसान संघ’के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवालने कहा कि हमें इस आन्दोलनमें किसान बन्धुओंसे बहुत अच्छा समर्थन मिल रहा है। राज्यमें (पंजाब) अधिकतर स्थानोंपर किसानोंने नगरोंमें विक्रयके लिए सब्जियां , दूध और अन्य खाद्य पदार्थोंको लाना बन्द कर दिया है।

दूध सब्जीकी आपूर्ति रोकी

हरियाणाके फतेहाबादमें एक व्यापारी सब्जी विक्रयके लिए मंडी जा रहा था; जिसे किसानोंने बीच रास्तेमें रोक कर सब्जियोंको सडकपर फेंक दिया। वहीं जीन्दमें भी ‘भारतीय किसान संघ’ने कहा कि नगरमें दूध और सब्जीकी आपूर्ति नहीं होगी !

पुणेके खेडशिवापुर ‘टोल प्लाजा’पर किसानोंने ४० सहस्त्र लीटर दूध बहा कर विरोध किया । महाराष्ट्रके कई और नगरोंमें भी आन्दोलनका प्रभाव देखने को मिला।

क्या है किसानोंकी मांगे ?
– देशके समस्त किसानोंको सम्पूर्ण ऋण मुक्त करना !
– किसानोंको उनकी उपजका डेढ गुणा लाभकारी मूल्य मिले !
– अत्यन्त लघु किसान, जो अपने उत्पादन विक्रय करने मंडी तक नहीं पहुंच पाते, उनके कुटुम्बके जीवनयापन हेतु उनकी आय सुनिश्चित हो !
– दूध, फल, सब्जियोंका लागतके आधारपर डेढ गुणा लाभकारी समर्थन मूल्य मिले !



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