मई १०, २०१९
इन्दौरके खजराना मन्दिरमें भगवान गणेशपर भाजपाके चुनाव चिह्नवाला चोला चढानेको आदर्श आचार संहिताका उल्लंघन मानते हुए भाजपा प्रत्याशी शंकर लालवानी और पुजारी अशोक भट्टपर प्राथमिकी (एफआईआर) प्रविष्ट की गई है । इस प्रकरणमें जिलाधिकारी (क्लेक्टर) भी दोषी हैं; क्योंकि मंदिरके प्रशासक स्वयं जिलाधिकारी हैं और पुजारी प्रतिनिधि हैं । विधानके अनुसार प्रधान व्यक्ति ही किसी भी अच्छे या बुरे कार्यके लिए उत्तरदायी होता है । उसीके अनुसार मन्दिरके प्रशासक होनेके कारण जिलाधिकारी स्वयं भी आचार संहिता उल्लंघनके लिए उत्तरदायी है । इस सन्दर्भमें अधिवक्ता पंकज वाधवानीने इसकी परिवाद चुनाव आयोगसे की है । वहीं मन्दिरके पुजारीने इस प्रकरणमें स्पष्ट किया है कि वे चुनावकी आदर्श आचार संहिताके जानकार नहीं हैं ।
भाजपा प्रत्याशी लालवानीने खजराना गणेश मन्दिरमें अपनी पार्टीके चुनाव चिह्नका चोला व ध्वजवाले वस्त्र पहनाए थे । इसकी परिवाद चुनाव आयोगसे की गई । परिवादका परीक्षण करनेके पश्चात उनके विरुद्घ प्राथमिकी प्रविष्टकर दी गई । अधिवक्ताने बताया कि जिस प्रकारसे भाजपा प्रत्याशी व खजराना मंदिरके पुजारीके विरुद्घ आचार संहिता उल्लंघनके अन्तर्गत प्रकरण पंजीबद्घ किया है, उसीप्रकार यदि वैधानिक रूपसे देखा जाए तो प्राथमिकीके लिए आदेशित करनेवाले स्वयं प्राथमिकीमें हैं और वे आचार संहिताका उल्लंघन होनेके कारण स्वयं भी उत्तरदायी हैं ।
इस प्रकरणमें उच्चजिलाधिकारी भव्या मित्तलने बताया कि भाजपा प्रत्याशीपर प्राथमिकी प्रविष्ट होनेके पश्चात अब चुनाव आयोगके नियमानुसार कार्यवाही होनी है । वहीं जिलाधिकारीके विरुद्घ ऐसी कोई भी परिवाद (शिकायत) अबतक हमारे पास नहीं आई है ।
पुजारी अशोक भट्टने कहा मैं आचार संहिताका जानकार नहीं हूं । प्रत्याशियों और श्रद्धालुओंद्वारा लाई जानेवाली पूजन सामग्रीपर मेरा नियन्त्रण है । श्रद्धालुओंके साथ ही भिन्न-भिन्न पार्टीके प्रत्याशी आकर पूजन-पाठ करते हैं । अपने साथ पूजनकी सामग्री भी लाते हैं । उनकेद्वारा लाई गई पूजनकी सामग्रीपर मेरा कोई नियन्त्रण नहीं है । उस दिवस भाजपा प्रत्याशी लालवानी भी खजराना गणेशके पूजनके लिए आए थे । उन्होंने भगवानको अर्पित करनेके लिए जो सामग्री दी, उसे मैंने चढाया ।
चोला चढानेके १० मिनट पश्चात इस ओर मेरा ध्यान एक भक्तने दिलाया । उनके ध्यान दिलाते ही मैंने चोला उतार दिया । मेरा किसी पार्टीको कोई समर्थन नहीं है, न ही मैं किसीका प्रचार-प्रसार कर रहा हूं । प्राथमिकीकी सूचना मुझे सामाजिक प्रसार माध्यमसे मिली है । प्राथमिकी प्रविष्ट हुई है तो उस सम्बन्वमें वैधानिक प्रक्रियाका पालन करूंगा ।
“कुछ दिवस पूर्व मध्यप्रदेशमें एक ज्योतिषाचार्यपर भविष्यवाणी करनेके कारण उनके शिक्षण संस्थानने उन्हें निलम्बित कर दिया और अब पुजारीपर प्राथमिकी प्रविष्ट कर दी, क्या अब मन्दिरमें पूजा करना अपराध है ? क्या अब यह निर्धारित किया जाएगा कि कब-कब भगवानपर हरा वस्त्र चढेगा या भगवा ? कांग्रेस राज्य चुनाव आयोगके माध्यमसे ये कुकृत्य करना बन्द करें; अन्यथा जो सत्ता उन्हें दी गई है, उसका उनके हाथसे छूट जाना निश्चित है ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नई दुनिया
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