धर्मान्तरण हेतु दबाव बनानेके कारण आत्महत्या करनेवाली लावण्याका चित्रपट हुआ उजागर, पढाई करनेसे रोककर लगाया गया छात्रावासके कार्यमें 


२८ जनवरी, २०२२
         तमिलनाडुके तंजावुरमें धर्मपरिवर्तनके लिए मना करनेपर ‘ईसाई’ विद्यालयद्वारा उत्पीडन होनेके कारण लावण्याने आत्महत्या की । लावण्याने आत्महत्यासे पूर्व एक ‘वीडियो’में बताया, “मुझे छात्रावासमें कार्य करनेके लिए विवश किया गया और पढने नहीं दिया गया ।”  उसने विद्यालयद्वारा बलपूर्वक धर्मान्तरण करनेका आरोप लगाया । उसके अनुसार, छात्रावासकी महिला व्यवस्थापिका समायाने उसे कार्य करनेपर लगाया । मुझे पढाई करनी है, ऐसा कहनेपर व्यवस्थापिकाने पुनः दूसरे कार्योंमें लगाया । यह कार्य समाप्तकर अन्य कार्य करो, ऐसा वह कहती थी और किए गए कार्योंको अनुचित बताकर, वही कार्य पुनः करनेके लिए विवश करती थी । छात्राने कहा, “छात्रावासका द्वार बन्द करना और खोलना, जलका पम्प चलाना और बन्द करना आदि भी । दसवीं कक्षामें प्रथम स्थान आनेपर मुझे अच्छेसे पढाई करनी चाहिए थी; परन्तु मेरे ऊपर सौंपे गए कार्योंके कारण, मैं अच्छेसे पढाई नहीं कर पाई, मुझे कम अंक मिले; अतः मुझे यह सहन नहीं हो रहा था; इसलिए मैंने विष पिया । मुझे पोंगलके लिए घर जाना था; परन्तु पढाईका कारण बताते हुए ‘वॉर्डन’ने मुझे जानेकी अनुमति नहीं दी और छात्रावासमें ही रुकनेको बाध्य किया ।” ऐसा आरोप लावण्याने ‘वीडियो’में लगाया । ‘ईसाई’ विद्यालयने आरोप नकारा है । चित्रपट बनानेवाले व्यक्तिको उपस्थित होनेके लिए न्यायालयने आदेश दिया है ।
       शिक्षा स्थलोंपर बच्चोंका धर्मान्तरण कर पाना, ‘ईसाई मिशनरियों’को सरल लगता है; इसलिए वे बच्चोंको विवश करते रहते हैं । विवश करनेवाले ऐसे ‘कान्वेंट’ विद्यालयोंकी शासनद्वारा मान्यता निरस्त किया जाना ही देश-हितमें आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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