जनवरी २, २०१९
उच्चतम न्यायालयके पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजूने पार्कमें नमाजपर प्रतिबन्ध लगाए जानेको लेकर अपना विरोध व्यक्त किया है । काटजूने शासनसे प्रश्न किया है कि पार्कमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघकी शाखाएं नहीं प्रतिबन्धित हैं तो नमाजपर प्रतिबन्ध क्यों ? एक स्थानीय ‘यूट्यूब चैनल’से वार्ताके मध्य काटजूने कहा, ”हमारे संविधानमें लेख ‘१९(१) बी’ है, जो कहता है कि ‘ऑल सिटीजन्स हैव राइट टू पीसफुल्ली असेंबल विदआउट आर्म्स’ तो ये उस संविधानकी धाराका घोर उल्लंघन हैं ! मैंने देखा है कि पार्कोंमें ‘आरएसएस’की शाखाएं होती है, उसपे तो कोई प्रतिबन्ध नहीं, उनको तो आज्ञा नहीं लेनी पडती है और शुक्रवारकी नमाज ४५ मिनट या एक घण्टेकी होती है, उसमें क्या विरोध है कि कोई नमाज यदि पढ ले तो किसीका सिर काट लिया ? किसीका पैर काट लिया ? कर रहे हैं, करने दो जिसको ! स्वतन्त्रता होनी चाहिए तो ये तो एकदम अनुचित आदेश हुआ है और मैं इसका घोर विरोध करता हूं ।”
‘वीडियो’में काटजू नरेन्द्र मोदी शासनपर कुछ और मुद्दोंपर भडकते दिख रहे हैं । गायके मुद्देपर वह उसे मां माननेसे मना करते हैं और कहते हैं कि विश्व भरमें गाय खाई जाती है और गत दिवसोंमें केरलमें उन्होंने भी गौमांस खाया था ! काटजू गायकी तुलना कुत्ता और घोडे जैसे पशुओंसे करते हैं । वह कहते हैं कि वह ६ माह अमेरिकामें रहकर आए हैं और वहां लोग हिंदुस्तानका उपहास करते हैं । काटजू कहते हैं कि विश्वमें लोग कहते हैं कि यहां गधे भरे पडे हैं ।
“नमाजमें यत्र-तत्र एकत्र होनेके पश्चात धर्मान्ध उपद्रव करते हैं, गौहत्या करते हैं, आइएसके ध्वज फहराए जाते हैं, यह आए दिन समाचार आते रहते हैं, क्या कभी आरएसएसकी शाखाओंमें काटजूने यह सब होते देखा है ? और काटजू अमेरिकामें ६ माह रहे हैं तो यहां सबको गधा कह रहे हैं, तनिक एक माह किसी खरे सन्तके आश्रममें भी जाते तो सम्भवतः उनकी भ्रष्ट बुद्धिपर मैकॉले शिक्षापद्धतिका तामसिक ज्ञानका आवरण हटता और सम्भवतः उन्हें गाय और गधेमें अन्तर समझमें आता !!”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जनसत्ता
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