देहलीके हिन्दू विरोधी उपद्रवमें शाहरुख पठानपर आरोप सुनिश्चित, शस्त्रयुक्त आक्रमणकारीके समक्ष साहस दर्शानेवाले ‘कांस्टेबल’ दहियापर न्यायालय प्रसन्न 


०९ दिसम्बर, २०२१
              देहलीमें ‘सीएए’ व ‘एनआरई’का विरोध करते हुए किए गए उपद्रवोंके समय शाहरुखने ‘कांस्टेबल’ दहियापर गोली चलाई थी । न्यायालयने इसे गम्भीर अपराध माना है । न्यायालयने दहियाकी स्तुति करते हुए कहा कि शाहरुखके हाथमें बन्दूक थी, ‘कांस्टेबल’ दहियाके पास मात्र डण्डा था, तब भी वे अपराधीके समक्ष दृढतापूर्वक खडे रहे ।
                  शाहरुखके अधिवक्ताने कहा कि वह दूसरी गोली चला सकता था; पर उसने नहीं चलाई, अर्थात वह ‘कांस्टेबल’की हत्याका इच्छुक नहीं था । न्यायालयने यह बात मान्य नहीं की । न्यायालयका मत था कि ‘पुलिस’पर वार करना ही गम्भीर अपराधकी श्रेणीमें आता है ।
           न्यायालयने शाहरुखको ‘आर्म्स एक्ट’की धारा-२५, २७ व ‘आईपीसी’की धारा-३०७, १४७, १४८, १४९,१८६, १८८ व ३५३ के अन्तर्गत आरोपी माना । शाहरुख पठानके संग अपराधमें सम्मिलित रहे शमीम व अब्दुल शहजादको धारा-३०७ व ‘आर्म्स एक्ट’में आरोपी माना । कलीम अहमदने शाहरुखको सुरक्षा दी; अतः उसे धारा-२१६ के अन्तर्गत आरोपी मान्य किया । एक अपराधी बाबू वसीमपर बन्दी बनाए जानेपर कार्यवाही होगी । वह पलायन कर गया है ।
        देहलीके उपद्रवमें हिन्दुओंकी आपणी, उनके घर जला दिए गए । अनेक हिन्दुओंकी निर्दयतापूर्वक हत्याएं की गईं । ‘कांस्टेबल’ दहियाने शस्त्रविहीन होते हुए भी साहस दिखाया; अतः न्यायालयद्वारा उनकी प्रशंसा उचित है । शाहरुख व उसके साथियोंको कठोरतम दण्ड मिले, जिससे कि ये अपराधी ‘पुलिस’पर आक्रमण करनेका दुःसाहस न कर सकें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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