सितम्बर ३, २०१८
देशमें २०७१ किलोमीटर क्षेत्रमें बहने वाली नदी गंगाके बारेमें वर्ल्ड वाइड फण्डका (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) कहना है कि गंगा विश्वकी सबसे अधिक संकटग्रस्त नदियोंमें से एक है ! लगभग सभी दूसरी भारतीय नदियोंकी भांति गंगामें निरन्तर प्रथम बाढ और फिर सूखेकी स्थिति पैदा हो रही है !
‘आईएएनएस’के अनुसार देशकी सबसे प्राचीन और लम्बी नदी गंगा उत्तराखण्डके कुमायूंमें हिमालयके गोमुख नामक स्थानपर गंगोत्री हिमनदसे निकलती है । गंगाके इस उद्गम स्थलकी ऊंचाई समुद्र तलसे ३१४० मीटर है । उत्तराखण्डमें हिमालयसे लेकर बंगालकी खाडघके सुन्दरवनतक गंगा विशाल भू-भागको सींचती है । गंगा भारतमें २०७१ किमी और उसके बाद बांग्लादेशमें अपनी सहायक नदियोंके साथ १० लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफलके अति विशाल उपजाऊ मैदानकी रचना करती है !
गंगा नदीकी राहमें आने वाले राज्योंमें उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल सम्मिलि हैं । गंगामें उत्तरकी ओर से आकर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियोंमें यमुना, रामगंगा, करनाली (घाघरा), ताप्ती, गण्डक, कोसी और काक्षी हैं, जबकि दक्षिणके पठारसे आकर मिलने वाली प्रमुख नदियोंमें चम्बल, सोन, बेतवा, केन, दक्षिणी टोस आदि सम्मिलित हैं ।
यमुना गंगाकी सबसे प्रमुख सहायक नदी है, जो हिमालयकी बन्दरपूंछ चोटीके यमुनोत्री हिमखण्डसे निकलती है । गंगा उत्तराखण्डमें ११० किमी, उत्तर प्रदेशमें १४५० किलोमीटर, बिहारमें ४४५ किमी और पश्चिम बंगालमें ५२० किमीकी राह तय करते हुए बंगालकी खाडीमें मिलती है । गंगा पांच देशोंके ११ राज्योंमें ४० से ५० कोटि लोगोंका भरण-पोषण करती है । भारतमें गंगा क्षेत्रमें ५६५००० वर्ग किलोमीटर भूमिपर कृषि की जाती है, जोकि भारतके कुल कृषि क्षेत्रका लगभग एक तिहाई है ।
जहां तक प्रदूषणकी बात है तो गंगा ऋषिकेशसे ही प्रदूषित हो रही है । गंगा किनारे बस्तियां चन्द्रभागा, मायाकुण्ड, शीशम झाडीमें शौचालय तक नहीं हैं; इसलिए यह गन्दगी भी गंगामें मिल रही है ! कानपुरकी ओर ४०० किमी उलटा जानेपर गंगाकी दशा सबसे दयनीय दिखती है । इस नगरके साथ गंगाका गतिशील सम्बन्ध अब मुश्किल ही रह गया है । ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगाके किनारे परमाणु बिजलीघर से लेकर रासायनिक खाद तकके उद्योग लगे हैं । जिसके कारण गंगा निरन्त प्रदूषित हो रही है ।
भारतमें नदियोंका ग्रन्थों, धार्मिक कथाओंमें विशेष स्थान रहा है ।
“यह हिन्दुओंकी नपुंसकताका ही परिणाम है कि देवनदी गंगाकी यह विकट स्थिति हो गई है ! इस निधर्मी लोकतन्त्र व स्वार्थी शासन कर्ताओंने आज हिन्दू धर्म व इसकी विरासत नदियोंको नष्ट करनेपर लगे हैं और हिन्दुओंको नेताओंकी भक्तिसे समय नहीं मिलता है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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