पांच सहस्र रुपए देकर बंगालसे भारतमें होते हैं प्रविष्ट, ‘कबाडीवाले’ बनकर करते हैं घरका निरीक्षण, डकैती, दुष्कर्म और हत्याएं


१२ अक्टूबर, २०२१
      उत्तर प्रदेशमें लखनऊके चिनहटमें १० अक्टूबर २०२१ रविवारको मध्य रात्रिमें तीन अपराधियोंको बन्दी बनाया गया । ‘पुलिस’द्वारा इनका अभिज्ञान २३, २६ और २७ वर्षीय बंगलादेशी मुसलमान नागरिकोंके रूपमें हुआ । ‘पुलिस’से मुठभेडके मध्य इनके कुछ साथी भाग निकलनेमें भी सफल रहे, जिन्हें ढूंढा जा रहा है । लखनऊके ‘पुलिस’ आयुक्त ध्रुवकांत ठाकुरने बताया कि यह गुट डकैतीको परिणाम देनेके लिए निकला था; किन्तु इसी मध्य मल्हौर ‘रेलवे’ स्थानकके (स्टेशनके) समीप ‘पुलिस पेट्रोल पार्टी’से भिडन्त हो गई । ‘पुलिस’द्वारा कुछ सन्दिग्धोंको देखकर रुकनेके लिए कहे जानेपर, वे भागने लगे और गोलियां बरसानी आरम्भ कर दीं,  तो उत्तरमें दो अपराधियोंको गोली लगनेसे चोटिल होनेपर दबोच लिए गए; यद्यपि अन्य भागनेमें सफल रहे ।
      पूछताछमें बांग्लादेशी युवाओंने भिन्न-भिन्न क्षेत्रोंमें लूटपाटके विषयमें बता दिया । पांच सहस्र रुपए देकर बंगालके २४ परगनाके मार्गसे भारतमें घुसते हैं और ‘रेलगाडी’द्वारा   देशके विभिन्न भागोंमें पहुंचते हैं । ‘रेलवे’ पटरीके आसपासके क्षेत्रोंमें ‘कबाडी’, चायवाला या फेरीवाला बनकर घरोंकी ‘रेकी’ करते हैं । प्रायः ऐसे घरोंको लक्ष्य करते हैं, जो ‘रेलवे लाइन’के निकट अथवा रिक्त स्थलोंपर बने हों । डकैती करनेके पश्चात, धन और आभूषण अपने किसी साथीके साथ बांग्लादेश भेज देते हैं, जिससे पकडे जानेपर बच जाएं !
      अपराधी परस्पर बंगालीमें ही वार्तालाप करते हैं । चलभाषके स्थानपर ‘वाकीटॉकी’का प्रयोग करते हैं । १५ फुटकी भीत (दीवार), ये सरलतासे फांद लेते हैं । लोहेकी ‘ग्रिल’ काटनेके ‘ब्लेड’, पेचकस तथा देशी तमंचे (पिस्टल) भी साथमें रखते हैं । डकैतीके मध्य, ये घरमें उपस्थित लोगोंको बन्धक बना लेते हैं । विरोध करनेपर लाठियों और लोहेकी सीखोंसे उनकी निर्मम पिटाई करते हैं । कभी-कभी घरकी महिलाओंके साथ दुष्कर्म भी करते हैं । उल्लेखनीय है, देहलीके आनन्द विहारके एक घरमें इस ११ सदस्यीय गुटने डकैतीके मध्य विरोध किए जानेपर एक वृद्ध महिलाके सिरपर लोहेकी सीख मारकर हत्या कर दी थी ।
      घुसपैठियोंका भारतमें घुसना, स्थानीय भ्रष्टाचारी अधिकारियोंकी मिलीभगतसे ही सम्भव हो सकता  है । घुसपैठियोंके साथ-साथ उन भ्रष्ट तुष्टीकर्ताओंपर भी अङ्कुश लगाना अति आवश्यक हो गया है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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