देशके प्रथम ‘गौ अभ्यारण्य’के द्वार गायोंके लिए बन्द !


जुलाई ३०, २०१८

राजस्थान शासनने २९ जुलाई २०१८ को ‘गाय सेंचुरी’ स्थापित करनेके लिए ‘एमओयू’की घोषणा की है; लेकिन उससे पहले मध्यप्रदेशमें देशकी प्रथम ‘गाय सेंचुरी’ धनकी कमी से जूझ रही है ! मध्यप्रदेशके आगर प्रान्तके सलारिया ग्राममें देशके प्रथम गाय अभ्यारण्यकी स्थापना की गई थी । इस वर्ष फरवरीमें इस अभ्यारण्यकी स्थापना बडे धूमधाम से की गई थी; लेकिन अब यह धन और कर्मचारियोंकी कमी से जूझ रही है ! सलारिया ग्राममें ४७२ हेक्टेयरमें देशकी प्रथम अभ्यारण्य सितम्बर २०१७ में आरम्भ हुआ था; लेकिन इस वर्ष फरवरीसे यहां गायोंके प्रवेशपर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है ! कारण है कर्मचारियों और धनकी न्यूनता !

यहांपर उन गायोंको आश्रय देनेकी बात कही गई थी, जिन्हें निराश्रय घूमनेके लिए छोड दिया जाता है । इसके अतिरिक्त इस अभ्यारण्यके सहारे कीटनाशक और रसायनिक औषधियोंके स्थानपर गायके मल-मूत्रके उपयोगको बढावा देना भी था । यहांपर २४ आश्रयस्थलोंमें लगभग ६००० गायें रखी जानी थीं; लेकिन अभी यहांपर ४१२० गायें हैं । अभी से यह अभ्यारण्यपर धनकी न्यूनता से जूझ रही है । अभी जो निधि मिल रही है, उससे ‘एनीमल हसबेंड्री डिपार्टमेंट’ इन गायोंको केवल चारा दे पा रहा है ।

‘इण्डियन एक्सप्रेस’के ब्यौरेके अनुसार कहा जा रहा है कि इस अभ्यारण्यके लिए लगमग १० कोटि रुपयोंकी आवश्यकता है; लेकिन अभ्यारण्यको केवल ४ कोटिकी निधि ही मिल रही है । ऐसे में प्रश्न उठता है कि नूतन परियोजना कहांसे आरम्भ होंगी, जब पहले ही परियोजनाकी ऐसी स्थिति है । सूत्रोंके माध्यमसे मध्यप्रदेश गाय संवर्धन मण्डलसे अब अनुदान लेनेके लिए भी सुझाव दिया जा रहा है ।


इस गाय अभ्यारण्यके डिप्टी डायरेक्टर और संचालक डॉ. वीएस कोसरवाल भी यहांपर धनकी न्यूनताकी बात मानते हैं । उनका कहना है कि हमने इस फरवरी से यहांपर गायोंके प्रवेश देनेपर प्रतिबन्ध लगा दिया है । इस क्षेत्रके एसडीएमने इनके परिवहनपर प्रतिबन्ध लगा दिया है । इस अभ्यारण्यके आरम्भके पश्चात प्रदेशके वित्त विभागको गाय संवर्धन मण्डलने २२ कोटिका प्रस्ताव भेजा था; लेकिन विभागने उसे नकार दिया । इसके पश्चात १४ कोटिका दूसरा प्रस्ताव भेजा गया, उसे भी नकार दिया गया !

इस अभ्यारण्यकी अपनी कोई आय नहीं है । यहां पर अधिकतर वृद्ध और ऐसी गाएं हैं, जिन्होंने दूध देना बन्द कर दिया है । यहांपर तीन ‘बायोगेस प्लांट’ हैं, जिनसे बिजली उत्पन्न होती है । मध्यप्रदेशके पशु पालन मन्त्री अन्तर सिंह आर्यका कहना है कि इस अभ्यारण्यके लिए आ रही धनकी न्यूनताका प्रकरण हमने मुख्यमन्त्री शिवराज सिंहके समक्ष उठाया है । उन्होंने कहा है कि धन शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा । उन्होंने कहा, शासन इस अभ्यारण्यकी देखरेखको एनजीओको देनेके प्रस्तावपर भी विचार कर रही है ।

स्रोत : जी न्यूज



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