गौमाताकी उत्त्पति


देवताओं और दानवोद्वारा समुद्र मंथनके कालमें  ५ गायें उत्पन्न हुई, इनका नाम था- नंदा, सुभद्रा, सुरभि, सुशीला और बहुला । ये सभी गायें भगवानकी आज्ञासे देवताओं और दानवोंने महर्षि जमदग्नि, भारद्वाज, वशिष्ट, असित और गौतम मुनिको समर्पित कर दीं । आज जितने भी देशी गौवंश भारत एवं इतर देशोमे है, वह सब इन्ही ५ गौओंकी संताने है और हमारे पूर्वजो एवं ऋषियोंका यह महाधन है । क्या हम मात्र गोत्र बतानेके लिए ही अपने ऋषियोंकी संताने हैं? उनकी सम्पति गौ धनको बचाना हमारा कर्तव्य नहीं !!!
गौ सेवाका लाभ :
शास्त्र कहता है — गौ भक्त जिस-जिस वस्तुकी इच्छा करता है वह सब उसे प्राप्त होती है | स्त्रियोंमे भी जो गौओंकी भक्त है, वे मनोवांछित कामनाएं प्राप्त कर लेती है । पुत्रार्थी पुत्र पाता है, कन्यार्थी कन्या, धनार्थी धन, धर्मार्थी धर्म, विद्यार्थी विद्या और सुखार्थी सुख पा जाता है । विश्व भरमे कही भी गौभक्तको कुछ भी दुर्लभ नहीं है । यहांं तक कि इस मृत्यु लोक भी बिना गायके पूंछ पकडे संभव नहीं । वैतरणीपर यमराज एवं उसके गण भयभीत होकर गायके पूंछ पकडे जीवको प्रणाम करते है ।



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